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तुम गीत लिख पाते हो!

Abhay DixitAbhay Dixit January 11, 2022
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जब भी कुछ में लिखता हूँ,
कैसे बो सुन लेती है!
मेरी हर लिखे गीत को,
खुदका गीत समझ लेती है!
जब भी में गाउँ कहीं तो,
कहती है कि तुम गीत मेरे ही
दोहराते हो!
जो जमाने भर को भाते तुम
पर  गीत मेरे ही गाते हो!
हर गीत नया शब्द बो होती है,
जब भी कुछ में नया लिखूँ तो,
बो नये नयेपन में ढल जाती है,
मुझसे कहती बड़े ढिठाई से,
कुछ अपना लिखो तो में जानू,
की तुम गीत लिख पाते हो!
नये गीत गाते हो!
~अभय दीक्षित

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