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तुम अगर साँस बनो !

Abhay DixitAbhay Dixit March 16, 2022
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तुम लौट आओ अगर तो, हम तुम्हारे आभारी हैं
खरीद लें सारे गम तुम्हारे,हम  बो  व्यापारी  हैं
मुझे छोड़ने के सिवा जो तुम्हें कुछ और न भाया है
न जाने बो कौनसा जादू है जो तुम पर चलवाया है
तुमने  जिन  हालातों में  छोड़ा है जरा उन राहों से पूछना
कैसे काटें हैं दिन-रात बिन तुम्हारे ये सूरज और चाँद से पूछना
जब तुम ही ऐसे छोड़ोगी तो कब तक यहाँ ठहरेंगे
तुम  अगर  साँस बनो , कुछ   ज्यादा  जी  लेंगे।।

जिन आँखों से देखते थे दुनिया, अब क्या ही देखेंगे,
तुम अगर साँस बनो  , कुछ ज्यादा जी लेंगे,
आ जाओ तुम फिर से,हाथों में हाथ लेके नई शुरुवात होगी
 प्रछन्नतायों से हटकर जरा सा, दिल की हर बात उजागर होगी
वही भाव आज भी  हमारा ,न कोई बदलाव हुआ है
तुम बिन कैसा रहा सफर , ये मत पूछो क्या हुआ है
तुम साथ रहोगी तो,हारकर भी जीतना सीखेंगे
तुम अगर  साँस  बनो  ,कुछ  ज्यादा  जी  लेंगे।।
~अभय दीक्षित




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