शाख पर जो परिंदे अब तक उदास बैठें हैं's image
Learn PoetryPoetry1 min read

शाख पर जो परिंदे अब तक उदास बैठें हैं

Abhay DixitAbhay Dixit February 10, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
शाख पर जो परिंदे अब तक उदास बैठें हैं,
क्या किसी के लौटने के विश्वास में बैठें हैं।।

मत पूछो किसी से कितने अपने रूठें है,
पूछो उनसे जो उनको मनाने में कितने टूटे हैं।।

जो काटों पे भी चलकर उदास लौटे हैं,
सच मानना बो किसी अंध्विश्वास में लौटे हैं।।

जो अपनों से ही हताश होके बैठे हैं,
बो बस साँस टूटने की आश में बैठे हैं।।
~अभय दीक्षित


#postivethink

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts