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राम सीता एक समर्पण सा.....

Abhay DixitAbhay Dixit April 10, 2022
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राम जीवन में एक समर्पण सा ,
सीता जीवन का एक विश्वास हैं,
दोनों जब एक ही डगर पर चले,
मानवता का रचा नया इतिहास है।।

राम मूर्ति मर्यादा पुरषोत्तम सी,
सीता भाव है त्याग का,
दोनों ही अपने धर्म में हमेशा बंधे रहे
 यही कर्म है मानव होकर देवता बनने का।।

राम वचनों में प्रेम का समर्पण बने,
सीता प्रेम में वचनों का निर्वाह बानी,
जब अमर प्रेम कथा को दुनिया ने सुना,
राम-सीता का समर्पण 
लोगो को अनुसरण की नई राह बनी।।

राम संघर्ष में भी सीखने की उमंग से,
सीता दुःख में धैर्य का स्वरुप सी,
दोनों जब एक दूजे का मनोबल बने तो,
 हर पारिस्थति में जीतने की नई उम्मीद मिली।।

राम युगों-युगों में प्रेम का अनन्त नाम सा,
सीता युगों-युगों में राम से पहले सीता राम हैं,
दोनों का जब पापियों के नाश को वियोग हुआ तो
लोगो को प्रेम में दुनिया को जीतने नई सीख मिली।।
~अभय दीक्षित

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