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में बो साथ हूँ जिसे साथ न माना  गया!

Abhay DixitAbhay Dixit March 6, 2022
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में बो साथ हूँ जिसे साथ न माना  गया


जानते हुए भी अनजान बनाया गया


में खतों में भी बो खत रहा हूँ


जिसे पढ़ा भी गया जलाया भी गया


जज्बातों में भी ऐसा जज्बात रहा में


जो कभी किसी से समझा न गया


में कहानी में भी ऐसा किरदार रहा


जो हमेशा पर्दे की पीछे बताया गया


जरुरत बना तो में हर एक का हुआ


पूरी होने पर में सबसे ठुकराया गया


में बर्षा बादल बन धरती सिर्फ के लिए


पर मुझे वहा कर नदी से मिलाया गया


किसी पंडित तो मेरा भाग्य अच्छा बताया


पर एक साजिश से मुझे अभागा बताया गया


में एक ही रहा पर अलग कर दिया


मेरे दिल और दिमाग को बांटा गया।।


~अभय दीक्षित

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