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कोई न यहाँ रुक पाया

Abhay DixitAbhay Dixit January 17, 2022
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बहुत आये बहुत गये,
 कोई न यहाँ रुक पाया! 
कोई काटों पर चलकर
मंजिल को पहुँचा,
किसी ने यूँ ही मंजिल को पाया!
कोई जीवन भर मांगता रहा,
किसी ने बिन मांगे सब पाया!
कोई तउम्र साथ रहा,
किसी को एक पल का भी
साथ, नसीब न हो पाया!
कोई फकीरी में मुस्कुराता रहा,
किसी को सब होते हुए उदास पाया!
कोई गुम-नाम होकर सब कर गया,
कोई नाम होते कुछ न कर पाया!
कोई धरती पर बोझ बन गया,
कोई खुदका भी कर्ज चुका आया!
किसी का प्रेम एक तरफ़ा रहा,
किसी ने प्रेम के बदले प्रेम पाया!
 जो भी यहाँ आया,
उसने अपनी मेहनत और कर्मो,
 का फल पाया!
बहुत आये बहुत गये,
 कोई न यहाँ रुक पाया!!
~अभय दीक्षित

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