जो हमारे मीत बनेंगे
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जो हमारे मीत बनेंगे बो ही अब संगीत बनेंगे!

Abhay DixitAbhay Dixit January 14, 2022
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मन को मन ही जीतेंगे,
खुद से कभी न हारेंगे,
जो हमारे मीत बनेंगे,
बो ही अब संगीत बनेंगे।।

मन दोबारा फिर मिलेंगे,
और नए संबंध बनेंगे,
नई कहानियों के लेखन होंगे
जिसमें कुछ अध्याय हमारे होंगे।।

गलियारों में नित नये-नये चर्चे होंगे,
उनमें कई वादे के जिक्र होंगे,
महफ़िल होगी रंग भी होंगे,
हम-तुम भी अब संग ही होंगे।।

जीवन में न कोई बंधन होंगे,
प्रेम में भाव समर्पण के होंगे,
हर दिल में नये अरमान सजेंगे,
जिनमें कुछ हमारे भी होंगे।।

जो टूट चुके थे बो उठेंगे,
अंधकार जुगनू हर लेगें,
सब यहाँ मानव ही होंगे,
कोई न अब संप्रदाय होंगे।।
~अभय दीक्षित
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