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हर रंग यहाँ पर गुलाल हुए !

Abhay DixitAbhay Dixit March 18, 2022
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 होली के इस  अवसर पर, मन में ऐसी उमंग उतर आई है
हर नर में श्री कृष्ण बसे हैं, नारी राधारानी बनके आई है
तन - मन सब कोमल हुए, हर रंग यहाँ पर  गुलाल हुए
अपनी गोपी के संग खेलन होली, हर छोरे यहाँ नन्दलाल हुए
होली के इस अवसर पर, आसमानी यहाँ सब रंग हुए
अपनी गोरी के हथ चुम्बन हेतु, हर छोरे यहाँ पर गुलाल हुए
ऐसे रंग उड़े सारे जहाँ में जैसे ब्रज उतरा हो चहुँ ओर
गोरे ,श्याम रंग का पता नहीं, गुलाल ही गुलाल नज़र आये चहुं ओर 
गुलाल ने ऐसा रंगा है तन -मन, धुले हुए मन के सारे मलाल हुए
कन्याकुमारी से कश्मीर केसर क्यारी तक सबके रंग  गुलाल हुए
 तन - मन सब कोमल हुए, हर रंग यहाँ पर  गुलाल हुए
अपनी गोपी के संग खेलन होली, हर छोरे यहाँ नन्दलाल हुए
प्रेम का उत्सव आया है, दिल ने फिर ,जवानी-बचपन को संग पुकारा है
रंगा है पिचकारी से तन को ,पर दिल में तुम्हारे ही प्रेम रंग का नजारा है
खोये हुए तन-मन ऐसे ,जैसे खो जाती है, गोपी की कृष्ण वंशी में
उड़ रहें हैं गुलाल अबीर ऐसे, जैसे प्रेम बरस रहा हो, सारी सृष्टि में
गुलाल ने ऐसा रंगा है सबको,की यहाँ बड़ा ही अद्भुत नजारा है
ब्रम्हा भी चौन्ध गया है, गुलाल ने कैसे सबको एक कर डाला है
देख आकाश से यह नजारा ,देवता भी आने को उत्सुक हैं
होली ऐसे खिल रही है, जैसे स्वर्ग बसा हो यहाँ की वस्ती-वस्ती में।।
~अभय दीक्षित







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