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हम बेगानी राह से निकले अपनी राह बनाने को

Abhay DixitAbhay Dixit December 8, 2021
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हम बेगानी राह से निकले अपनी राह बनाने को ,
कितने यहाँ लोग मिले हमको राह दिखाने को।
जो सफर हमने शुरू किया तो संघर्ष हमने अपना लिया,
जिसको हमने  अपना समझा उसी ने मुँह मोड़ लिया।
जो चले हम पथ पर न जाने कितने हमारे साथ चले,
फिर देखकर रास्ते के काँटे न जाने कितने साथ छोड़ चले।
जो चल रहे थे साथ में उनके मन में भी शंका थी,
यही कारण मार्ग में न चल पाने  की बिडम्बना थी।
जिनको हमने जगत विजेता समझा बो मन के द्वारे  हारे निकले,
जिनको हमने हारा समझा बो ही पथ के विजेता निकले।
हमने इन क्षणों में लोगों का दोहरा रूप देखा है,
जितने वाले का यहाँ अलग ही सम्मान देखा है।
जब जीत मिली हमको यहाँ सब खड़े तालीया बजा रहे थे,
जो कभी साथ आये नहीं थे बो भी रास्ते का संघर्ष बता रहा थे।
 जहाँ से चले थे जहाँ खड़े हैं उसमें काफी अंतर है,
जो कभी रास्ते के काँटे थे बो खुद फूल बिछा रहे थे।।
~अभय दीक्षित








 


 

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