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बो बे-शर्म तो चले आएंगे!

Abhay DixitAbhay Dixit January 13, 2022
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उन्हें हम बुलाये या न बुलाये,
बो बे-शर्म तो चले आएंगे!
मौसम खफा है तो रहने दो,
बो अब और नहीं रुक पाएंगे!
दिया था वक्त उन्हें पाँच साल का,
फिर भी न कोई वादा पूरा हुआ,
 एक-एक साल का,
फिर भी उनको आने की इतनी जल्दी है,
लगता है उनकी नॉटंकी समय अब पास है!
बे सोच रहें हैं, 
इस बार भी हम उनको पहले जैसे,
दो को सात बता आएंगे!
कोई उन्हें बुलाये या न बुलाये,
बो बे-शर्म तो चले आएंगे!
बो सोच रहे हैं,
जो सड़के पहले से ही वादों की बनी थी,
इस बार भी वादों से,
और मजबूत बनाकर आएंगे!
दिन को रात बनाने की पूरी कोशिश
 फिरसे करने आएंगे!
बो सोच रहें हैं,
इस बार भी फूलों की माला के बदले,
नये शब्दों की माला में उलझा जाएँगे!
बो घडी फिर से आ गई!
जिनको हमने कुछ न समझा इतने दिनों,
उनको भगवान समझने की बारी,
फिरसे आ गई!
कोई न सुने बात उनकी फिर भी
बार-बार दोहराएंगे!
विकास को इस बार भी,
साथ बो अपने लाएंगे!
बो कहेंगे,
कोई कितना भी खफा हो उनसे,
उसको गले लगाएंगे!
फिर भी न माने तो,
उनके चरणों में गिर जायेंगे!
कोई उन्हें बुलाये या न बुलाये,
बो बे-शर्म तो चले आएंगे!
~अभय दीक्षित

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