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यूँही कट जायेगी जिंदगी

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske February 20, 2022
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दर्दभरी दास्ताँ हो या हो 

सुहाना सफर हसी ख़ुशी 

नहीं पता कल क्या होगा 

यूँही कट जायेगी जिंदगी 




सांसो की रवानगी हैं बस 

जीने की अभिलाषा निरंतर 

सुख में कटे या दुःख में बटे 

यूँही कट जायेगी जिंदगी 



जिअं तो हर हल में होगा 

इधर - उधर की बातें न कर 

बस चलता जा भले को साथ न हो

 यूँही कट जायेगी जिंदगी 


तुम पाना हैं अपनी मंजिल बेशक 

तलाशना वो भविष्य हर हाल में अब तो 

संघर्ष तो अटल हैं जमीर भी जिन्दा रहे 

बिना रुके बिना थके यूँही कट जायेगी जिंदगी 


ऊँचे गगन में उड़न तो भरना हैं लेकिन 

यद् रहे पैरो तले जमीं ना खिसक जाये 

माना की आसान नहीं यह सब करना 

नहीं झुकना कभी यूँही कट जायेगी जिंदगी 

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