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मैंने गाँधी को नहीं मारा

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske February 21, 2022
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 मैंने गाँधी को नहीं मारा ?

बड़ी बेशर्मी से कहते हो

सत्य अहिंसा से डरते हो 

नफरत का जहर बोते हो ?


मैंने गाँधी को नहीं मारा ?

बड़ी बेशर्मी से 

बिच बाजार चौराहा गोली मारी 

नतमस्तक होके ख़तम करो 

यह कैसा यार रिवाज तुम्हारा ? 


देशभाक्ति , समता बंधुता 

सविनय असहकार प्यारा 

बापू ने सही रास्ता दिखाया 

फिर भी क्या किया पूछते हो ?


.

 मैंने गाँधी को नहीं मारा ?

कल तक कहनेवाले आज तो 

खुलेआम समर्थन में जुटे हैं 

सच बोलो दो फाक हम क्यों बटे हैं ? 


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 मैंने गाँधी को नहीं मारा ?

कहनेवाले तो गुनहगार हैं ही 

बापू का अपमान सहनेवालेही उतनेही 

गुनहगार हैं बापू तुम्हारे सिपाही कहा गये ? 


क्या तुम्हारी शहादत बेकार गई ? 

सोचा था कभी क्या यही लोग कल निक्कमे गुलाम 

तुम्हारे राहपर चलना तो दूर रोड़ा बनेगे 

हम सब चुपचाप तमाशा देखेंगे कब तक ? 


मैंने गाँधी को नहीं मारा ?

कहनेवालों याद रखो गाँधी 

कभी ख़तम होंगे ना उनके विचार 

लाख कर लो कोशिश जीत हमारी बेशक 

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