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इधर - उधर की बातें न कर

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske February 19, 2022
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इधर - उधर की बातें न कर 

काश ! ऐसा होता तो क्या होता ? 

हाँ कर चाहे ना कर नहीं तो चल निकल 

मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता तेरे आने जाने से 


इधर - उधर की बातें न कर 

नहीं चाहिए तेरी यादे न ही झूठे वादे 

तेरा होना भी मेरे लिये न होने के बराबर 

फिर किस बात का प्यार और अफ़सोस ? 


इधर - उधर की बातें न कर 

न कोई आस हैं तुज़से ,न भरोसा 

तेरे सिर्फ खोकले वादे ,सपने सुहाने 

तू तो हैं एक छलावा बेशक पहचाना 


इधर - उधर की बातें न कर 

बहुत हो चुकी तेरी नौटंकी 

आखिर कब तक यह जादूगरी 

गिरगिट की तरह यह रंगबाजी ?


इधर - उधर की बातें न कर 

उठा बाड़बिस्तर चल निकल 

यह कुछ नहीं मिलेगा तुझे 

साथ , विश्वास ना कोई हमदर्दी 

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