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गम की दवा हैं जोकर फिर भी

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske February 12, 2022
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मेरा नाम जोकर

खाता हूँ ठोकर दरबदर

रोता हूँ अंदर -अंदर

सबको हँसाता हूँ मगर 


इतना आसान नहीं होता भाई

इसतरह खुद का मजाक बनाना

दुखभरी जिंदगी में तुम्हे हँसाते रहना

घुट घुटकर जीकर भी , सबकुछ खोकर भी


जिंदगी भी एक रंगमंच प्यारे

यहाँ कोई नहीं होता पूछनेवाला

लाइट , एक्शन होता हैं न मौका

हरतरह जिल्लत और धोका


दुसरो पे हँसना ताली बजाना

सबकुछ सही मगर कभी सोचा हैं

क्या हैं हमारी जिंदगी , क्यों हैं ऐसी ?

गम की दवा हैं जोकर फिर भी ठोकर जानेअनजाने में

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