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अभी भी क्यों लगता हैं तुम यही कहीं हो

Abasaheb MhaskeAbasaheb Mhaske May 4, 2022
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क्या फर्क पड़ता हैं गलती तेरी थी या मेरी ?

जो हुवा सो हुवा न कोई गम हैं पछतावा

जानेवाले वापस नहीं आते यार कभी

पागल मन को समझाया सौ दफा


क्या फर्क पड़ता हैं हम जिए या मरे

तुझसे नफरत करे या मोहब्बत

तू अब मेरी हो नहीं सकती कभी

कितनी बार समझाया यार तुझे


क्या फर्क पड़ता हैं तुम अपने हो पराये

तब भी चाहते थे तुम्हे और आज भी उतनाही

क्यों ? कैसे और कब तक ? बता नही सकते

ना हटा सकते हैं जिंदगी से तेरे सपने तेरे अरमान


क्या फर्क पड़ता हैं भाई तुम साथ नही हो

अभी भी क्यों लगता हैं तुम यही कहीं हो

हर दम मेरे साथ हो परछाही की तरह

तुम मेरे लिए वही हो वही रहोगे जिंदगीभर  


क्या फर्क पड़ता हैं तुम याद करती हो या नहीं

भूल गई हो यार कभी कबार याद करती हो शायद

मोहब्बत ऐसी चीज हैं दुनिया में जो कभी ख़त्म होती नहीं

कभी मोहब्बत ख़तम होगी ना मोहब्बत करनेवाले 


क्या फर्क पड़ता हैं भाई तुम मेरे लिए क्या हो

तेरी यादे तेरे सपने मुझे जिन्दा रहने के सहारा

वही बहुत हैं , जी लेंगे तुम्हारे यादो के बारात में

सपनो का राजकुमार जीता हैं आशाभरी निगाहो से




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