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मनुज लाँघते कितने अंबर..

AakshiniiAakshinii September 28, 2021
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अभिलाषाओं-आकांक्षाओं के

कितने भूधर

लेकर अपने हिय के भीतर

मनुज लाँघते कितने अंबर


कितने सरित-गिरी और गह्वर

कितने कंटक-सुमन और शर

धूप-घाम-घन पानी पत्थर

जल-थल-नभ सब छू कर


मनुज लाँघते कितने अँबर

कितने सागर कितने भँवर

मनुज ठानते कितनी टक्कर..


~अक्षिणी




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