बच्चे की हँसी's image
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एक बार एक स्कूल में मास्टर जी बच्चों को सिखा रहे थे कि हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिये। सब बच्चे बहुत ध्यान से मास्टर जी की बात सुन रहे थे मगर एक बच्चा कक्षा से बाहर देख रहा था। मास्टर जी का ध्यान उस बच्चे की तरफ़ गया और मास्टर जी ने गुस्से में उससे पूछा कि तुम बाहर क्या देख रहे हो, मैं यहाँ इतनी ज़रूरी बात बता रहा हूँ और तुम बाहर देख रहे हो। मास्टर जी की बात सुनकर बच्चा डरते हुए बोला, " मास्टर जी, मुझे क्षमा करें, मगर जो बात आप बता रहे हो वह मैं पहले से ही जानता हूँ। मेरी मम्मी ने मुझे यह बात पहले से ही सिखाई हुई है कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिये, इसिलिए जब आप यह बात बता रहे थे तब मैं बाहर बैठे हुए कुत्ते को देख रहा था"। इतना सुनकर मास्टर जी गुस्से से लाल हो गये और बोले,"और क्या-क्या सिखाया है तुझे तेरी मम्मी ने, क्या यह भी सिखाया है कि जब मास्टर जी पढायें तब बाहर बैठे हुए कुत्ते को देखना"।
बच्चा डर जाता है और कोई जवाब नहीं देता। फिर मास्टर जी उसको कक्षा से बाहर यह कहकर निकाल देते हैं कि तू आज कुत्ते को ही देख।


बच्चा उदास होकर कक्षा से बाहर आ जाता है और अब वह मास्टर जी की बातों को सुनने लगता है। इस बार मास्टर जी ने बच्चों से कहा कि हमें कभी झूठ नहीं बोलना चाहिये। यह सुनकर बाहर खड़े बच्चे को हँसी आ गयी और वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा। यह देखकर मास्टर जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और उन्होनें उस बच्चे को कक्षा में बुलाकर दो थप्पड़ मारे और पूछा,"इसमें हँसने वाली क्या बात थी"। बच्चे ने कोई जवाब नहीं दिया और रोने लगा। मास्टर जी उसको प्रिंसिपल के ऑफिस में ले गये और सारी बात विस्तारपूर्वक बतायी। प्रिंसिपल ने बच्चे को चुप होने को कहा और पूछा,"जब मास्टर जी तुम्हें पढ़ा रहे थे तो तुम हँस  क्यों रहे थे"?
बच्चा चुप हो गया मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया। प्रिंसिपल साहब के दो-तीन बार पूछने पर भी बच्चे ने कोई जवाब नहीं दिया। अब प्रिंसिपल साहब को भी बच्चे पर गुस्सा आने लगा और उन्होंने मास्टर जी से कहा कि इसको यहाँ से ले जाओ और कल इसके मम्मी-पापा को मेरे ऑफिस में बुलवाओ।
मास्टर जी ने बच्चे को कक्षा में ले जाकर दो थप्पड़ और मार दिये और कहा कि कल अपने मम्मी-पापा को साथ में लेकर आना, वरना स्कूल मत आना। इस बार थप्पड़ लगने के बाद बच्चा रोया नहीं बस सर झुकाए खड़ा रहा। तब कक्षा में बैठा एक दूसरा बच्चा बोला,"मास्टर जी, सोनू के पापा नहीं हैं, इसके घर में सिर्फ यह और इसकी मम्मी रहते हैं।"
मास्टर जी को थोड़ा बुरा महसूस हुआ, उन्होनें सोनू को उसके स्थान पर बैठने को कहा। सोनू अपने स्थान पर जाकर बैठने ही वाला था कि तभी एक घंटी की आवाज़ आई और सब बच्चे अपना थैला उठाकर मास्टर जी को प्रणाम करते हुए बाहर जाने लगे। यह घंटी छुट्टी की थी।
सोनू भी अपने घर को जाने लगा। सोनू का कोई दोस्त नहीं था इसलिए वह अकेले रहना ही पसंद करता था और सब बच्चों के पीछे ही चलता था। सोनू रोजाना रास्ते में नदी, पहाड़, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी को देखता हुआ जाता था मगर आज वह सर झुकाये चला जा रहा था। आखिरकार, वह घर पहुँचा और मम्मी को प्रणाम किया, फिर खाना खाकर पढ़ने बैठ गया। उसकी मम्मी ने पूछा,"आज क्या सिखाया है, मास्टर जी ने"?
सोनू ने जवाब दिया, आज मास्टर जी ने सिखाया है कि हमें कभी झूठ नहीं बोलना चाहिये।
मम्मी मुस्कराती हुई बोली,"यह तो बहुत अच्छी बात सिखायी है, मास्टर जी ने"। सोनू ने फिर मम्मी को अपनी पिटाई की बात भी विस्तारपूर्वक बताई और कहा कि आपको कल मेरे साथ स्कूल जाना होगा। मम्मी ने पूछा,"आखिर तुम हँसे क्यों थे"?
सोनू ने मम्मी को भी कोई जवाब नहीं दिया और बात को बदलते हुए अपने पापा के बारे में पूछने लगा। मम्मी ने उसको बताया कि उसके पापा उसके पैदा होने से पहले ही गुजर गये थे। सोनू ने फिर पूछा,"मम्मी, क्या झूठ बोलने से कुछ बुरा होता है"? मम्मी ने उसको जवाब दिया कि बुरा तो नहीं होता है मगर जिससे हम झूठ बोलते हैं, हम उसके विश्वास को तोड़ देते हैं; हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।
सोनू को समझ आ गया कि उसे झूठ नहीं बोलना चाहिए था मगर अपने हँसने का कारण वह किसी को क्यों नहीं बता रहा था?
क्या आप लोग समझ पाये?
यदि नहीं, तो कहानी को एक बार फिर से पढिए और पता लगाईये कि आखिर सोनू हँस क्यों रहा था?

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