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सरल होना जैसे खुद की समझ से उभरते रहना

Aaditya Narayan ShakyaAaditya Narayan Shakya July 23, 2022
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सरल होना जैसे खुद की समझ से उभरते रहना |


मन के सरल रहने का असर,

हर समय गहराता हैं,

सरल होना जैसे खुद की समझ से उभरते रहना,

खुद को जानते हुए, 

खुद के आनंद में मगन रहना।


काम को करते-करते, 

खुद का रूठा मन,

अगर बिखर जाए,

तो सरलता को,

छूटा पाओगे।


सरल, सुंदर और अटल,

मन की उस सरलता को,

सहजता की सेवा में रखना,

अगसर, मन सरल रहने में सक्षम होता है,

रूठ उसकी सहजता जाती हैं।


सहजता चेतन मनुष्य में,

एक ऐसा हिस्सा हैं,

जो चेतना होके,

चेतना को जीवन से बाँधे रखती है,

जो बदलाव में भी एक सी रहती है।


अगर सहजता बिखर जाए,

तो मन की उस सरलता को,

जीवन मे जगह-जगह,

कदम-कदम पे,

पिरोनी पड़ती हैं।


जहाँ फिर,

या कोई उचित किताब,

या कोई रोमांचक ऊँचाई,

उसकी आहट को,

दस्तक़ देती हैं।


सिर्फ दस्तक़ इसलिए,क्योंकि सहजता,

समय के साथ, 

खुद के आनंद को समझती है,

जीव को जीवित रखती है।


©आदित्य नारायण शाक्य

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