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जीवन में सहजता पिरोये रखना, जीव को जीवन का आनंद लेने में मदद करता है |

Aaditya Narayan ShakyaAaditya Narayan Shakya July 27, 2022
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जीवन में सहजता पिरोये रखना, जीव को जीवन का आनंद लेने में मदद करता है | 



जीवन में सहजता पिरोये रखना, 

एक ऐसा कर्तव्य है,

जिससे हुए कर्म, 

जीव में चेतन मन को,

निर्मल,सच्चा,और मुक्त रखते है ||


जन्म से पिरोये हुए भाव,

जब उगते है तब चेतन मन का प्रयोग होता है,

कभी कुछ जानने को या कभी कुछ समझने को,

तब उनके साथ सहायक हुई चेतना को,

सहज रहे पाना सरल नहीं || 


ऐसा नहीं की तब मन सहज रहता नहीं,

चेतन मन के अधूरे हिस्सों की वजह से,

सहजता, चेतना के उगते हुए हिस्सों से उभरने में समय लेती है,

जिसकी वजह से सहजता खुद को,

समझने का आनंद लेती है ||


निर्मलता खुद को हमेशा,

सहजता से जोड़ती रहना चाहती है,यही उसकी एकमात्र परिकल्पना रहती है,

इसी वजह से चेतन मन के,

सहज होने का उसे हमेशा इंतजार रहता है || 


जैसे एक नया सदस्य जब जन्मता है,

और परिवार का हिस्सा हो जाता है,

लेकिन फिर भी उसे समझने में, पहचान में समय लगता है,

वैसे ही चेतन मन को अपने ही नए हिस्से को,

जानने में, समझने में समय लगता है || 


उसके साथ निर्मल होने में,

उसके साथ सच्चा होने में,

उसके साथ मुक्त होने में,

उसके साथ सहज होने में,

जीव, को जीवन का आनंद लेने में मदद करता है ||


©आदित्य नारायण शाक्य


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