आईने की कैद's image
Share0 Bookmarks 36 Reads0 Likes

 आईने की कैद 


परछाइयों की कैद,

मैं पहचाने निकला,

भाव के दर्पण को || 


भूल बैठे की,

सत्ता तो अभी,

परछाईयों की हैं || 


परछाइयों ने,

तोड़ के दर्पण,भाव को बनाया बंदी || 


टूटे दर्पण की,

पहचान लिए,

मैं बैठा सुबह-शाम || 


कष्टों की,

परछाइयों लिए, 

भाव रहा बंदी ||


परछाइयों के,

पालन-पोषण हेतु,

भाव रहा बंदी || 


दर्पण की परछाई को,

मैं मान बैठा सच,

अभाव में पिरोया कष्ट ||


©आदित्य नारायण शाक्य



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts