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एक ठिकाना

A MehtaA Mehta October 7, 2021
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भगत सिंह, अशफ़ाक यहीं है

लाजपत राय, आज़ाद यहीं है

यहीं उठी शिवाजी की ललकार

यहीं टकराई टीपू की तलवार


गौतम भी, घनश्याम यहीं है

गुरु गोविन्द, साई राम यहीं है

यहीं हुई मीरा दीवानी

यहीं गूंजी कबीर की वाणी


यहीं रत्नाकर बने वाल्मीकि

दिया रामायण का ज्ञान

यहीं बुध्द बने महात्मा

पा करके निर्वाण

 

यहीं स्वर्णिम अमृतसर गुरद्वारा

यहीं वैष्णो देवी का भंडारा 

अजमेर शरीफ दरगाह यहीं है

येशु की गिरजा यहीं है


यहीं गीता, बाइबिल और कुरान

यहीं गुरबाणी, भजन और अज़ान

यहीं ढाई अक्षर प्रेम का

पढ़ते रहिमन संत सुजान


यहीं नानक नाम जहाज़ चला

सारे बोले सब दा भला

सब हैं उसके बन्दे नेक

बोले साई, सबका मालिक एक

 

सब जन्म मुझि से पाते हैं

फिर लौट मुझि में जाते हैं

भगवद गीता में कहते हरी

लिखते यही दिनकर कवी


तुझमे मुझमे कैसा भेद

हम सब उसके रूप अनेक

वहीँ से आये, वहीँ है जाना

तेरा मेरा एक ठिकाना !

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