मेरे शंकर - मुझे रहने दे सरल's image
Poetry1 min read

मेरे शंकर - मुझे रहने दे सरल

A MehtaA Mehta March 1, 2022
Share0 Bookmarks 2168 Reads1 Likes

पी न पाऊंगा सहज

नित कुंठाओं का गरल

तुझसा नहीं सहिष्णु मैं

हे नीलकंठ! मुझे रहने दे सरल


1) नीलकंठ - शिव जी का एक नाम  2) गरल - ज़हर  3) कुंठा - निराशा, परेशानी  4) सहिष्णु - सहनशील 


वश में न होंगे मुझसे

छल-कपट के विषैले सर्प

इस माया के जाल से

भोले, बस होने दे विरक्त


5) विरक्त - परे  6) विषैले - ज़हरीले 


जो दिखाए दुःख, पाप, त्रास

उस दिव्यदृष्टि का क्या करूँ

देख कर जग का अँधेरा

हृदय तमस से क्यों भरूँ


7) त्रास - कष्ट 8) तमस - अँधेरा


नष्ट करने इस भंवर को

तांडव तुझसा कर सकूं

मुझमे नहीं शक्ति वो

हे रूद्र, जो मैं लड सकूं


9) रूद्र - शिव जी का एक नाम 


बैठ कर कैलाश पर

मैं भी लगाऊं ध्यान जो

शीतल करे हिमालय सा

मेरे शंकर, ऐसा ज्ञान दो!

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts