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एक दिया जलाएं

A MehtaA Mehta November 9, 2021
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तुम भी फूँक डालो

अपने ह्रदय में बस रहे

ऊँच-नीच, धर्म-जात, भेद-भाव

के घिनौने, अभिशप्त रावण को


मैं भी कर देता हूँ भस्म

अपने मानस पटल पर बने

अंधकारमयी संकीर्ण विचारों का

जीर्ण- शीर्ण जर्जर यह महल



लेकर परस्पर सदभाव का सौंधा सा घी

आदर-आत्मीयता की नर्म बाती

नम्रता-विश्वास की उज्जवल लौ

चलो मिलकर आज

एक दिया जलाएं 



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