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बाहुबली हिदा मीणा झरवाल

Rohit Meena | रोहित लाहापुराRohit Meena | रोहित लाहापुरा November 21, 2022
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बाहुबली हिदा मीणा झरवाल (जयपुर) उस जमाने, के पहले बाहुबली योद्धा थे, जयपुर के राजा जयसिंह ने सन् 1734 में विष्णु के नाम पर एक यज्ञ का आयोजन किया, पंडितों ने यज्ञ में वृहद राज विष्णु की असली मूर्ति को दक्षिण भारत में कांचीपुरम से लाने के लिए बोला पहले राजा जयसिंह ने राजस्थान के सभी राजपूत राजाओं को लाने के लिए बोला सभी ने 2500-3000Km दूर से विष्णु जी कि मूर्ति को लाने से मना कर दिया,  राजपूतों के मना करने पर राजा जयसिंह ने मीणा सरदारों और जागीरदारों को बोला सभी ने बाहुबली हिदा मीणा का नाम लिया हिदा मीणा इतना बलशाली था कि अकेला 1000 योद्धाओं को मार कर जीत हासिल कर लेता था। 
ऐसा उसने कई युद्धो में किया, जयसिंह ने हिदा मीणा को जिम्मेदारी दी तो उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया। 

हिदा मीणा घोड़े पर सवार होकर दक्षिण भारत में कांचीपुरम जाकर पहले वहां के राजा से मूर्ति देने के लिए आग्रह किया, तो राजा ने उसे मूर्ति देने से मना कर दिया तब उसने अकेले वहां के राजा वह हजारों सैनिकों को युद्ध में मौत के घाट उतार कर विष्णु जी की मूर्ति को लेकर जयपुर आ गया। इसलिए हिंदा मीणा को तब से बाहुबली हिदा मीणा कहा जाता है।

राजघराना बाहुबली हिदा मीणा जी के इस प्रयास से अचंभित हो गई और राजा जयसिंह ने खुश होकर हिदा मीणा को इनाम देना चाहा तो हिदा मीणा ने मना कर दिया, अत्यधिक आग्रह किया तो हिदा के नाम पर घाटगेट दरवाजे के पास एक छोटी मोरी, रास्ता बनाने के लिए बोला, जयसिंह ने घाट गेट दरवाजे के पास परकोटे के किले की चारदिवारी में हिदा झरवाल के महल के पास, एक मोरी का नाम हिदा मीणा के नाम पर कर दिया। आज भी सरकारी रिकार्ड में हिदा की मोरी नाम है।

हिदा की मोरी बनने के बाद वह जयसिंह के महलो और परकोटे से बाहर हिदा झरवाल बिना रोक-टोक के आने-जाने लगा। इससे राजस्थान के बड़े-बड़े राजपूत राजा कुंठित और चिढ़ने लगे। हिदा मीणा को ठिकाने लगाने के लिए विभिन्न षड्यंत्र रचने लगे लेकिन वे सफल नहीं हुए।

   एक दिन एक, सामान्य हिदा नाम के व्यक्ति से आपसी झगड़े में एक व्यक्ति की मौत का अपराध हो जाता है। उधर राजपूतों, दरबारियों को मौका मिल जाता है। और वे बाहुबली असली हिदा मीणा को अपराधी घोषित करवा कर मरवा देना चाहते हैं और सभी राजा जय सिंह के पास जाकर झूठ मुँठ अनेक बातें असली हिदा मीणा का नाम लेकर राजा जयसिंह के कानों में भर देते हैं। तो राजा जयसिंह ने भी बिना सोचे समझे, बाहुबली हीदा मीणा को जयगढ़ के किले पर तोप से बाँधकर उड़ाने का आदेश दिया था।

आदेश मिलते ही सभी राजपूत, सामान्य हिदा की जगह असली हिदा मीणा योद्धा को ले जाकर तोप से बांध देते हैं। हिदा मीणा भी राजाज्ञा को सिर से लगाकर मौत को गलेगाने के लिए तोप से बंद जाता है। और गोले से उड़ा दिया जाता है।

        मृत्युड से पहले हिदा मीणा ने ईश्वर से प्रार्थना की कि मेरा सिर मेरे पुश्तैनी गांव, डोडा चौड़ कानोता. बस्सी में जाकर गिरे, ऐसा ही हुआ, उनका सिर, जयपुर से 25 किलोमीटर दूर उनके घर गिरा।

      अपने आपको मातृभूमि के लिए हीदा मीणा ने बलिदान कर दिया और आज भी घाट गेट के पास, अपने महल के पास, हिदा मीणा भौमियां जी के रूप में पुजे जा रहे हैं। 
       
       सर्व समाज और हिदा झरवाल के वंशजों ने उनके नाम से मंदिर भी बनाया है गांव में ओर जनहित में लोगों की मनोकामनाएं भी पूर्ण कर रहे है । 

कहा जाता कि बाद में जब राजा जयसिंह को असलियत का पता चला तो शराजपूतों को बहुत फटकारा और कहा आप लोगों ने मेरे हाथ से एक निर्दोष बाहुबली, चेहते योद्धा को मरवा दिया। इसी आत्मग्लानि और चिंता में राजा जयसिंह कुछ समय बाद मृत्यु को प्राप्त हो गए।

      बाद में राज परिवार ने सहानुभूति वश उनके परिवार को जयपुर के पास साईवाड़ गाँव की जागीर इनके नाम कर दी गई। 

 लिखते वक्त फक्र महसूस हो रहा है कि हमारे पूर्वज कितने बलशाली योद्धा थे पर विडंबना है समाज अपने पूर्वजों को भूल गया जो बहुत दुख का विषय है हिदा झरवाल मीणा समाज के एक महान बाहुबली बहादुर बुद्धिमान शक्तिशाली योद्धा थे।

      राजा जयसिंह के राजपुरोहित दरबारियों के षड्यंत्र का शिकार होकर अपने आप को बलिदान कर दिया। इस लेख को लिखते वक्त फक्र से सीना चौड़ा भी हो रहा था तो आंख में आंसू भी आ रहे थे आज समाज किस दिशा की ओर बढ़ चुका है, अपने पूर्वजों के इतिहास को खुद ही बर्बाद कर दिया कोई और समाजो पर अंगुली उठाने से पहले अपने ऊपर अंगुली उठाएं और अपने पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास को जानने की चेष्टा दिखाये संरक्षण करने के लिए आवाज उठाई यहां तक 70% मीणा समाज को अपने इतिहास के बारे में कोई जानकारी नहीं है वह बस इतना जानते हैं की मीणा पहले आदिवासी थे और उससे पहले जो वीर योद्धा थे मैं जानने की चेष्टा या प्रयास कभी नहीं किया।

मैं अजय झरवाल जी, ब्रजमोहन मीणा जी और उनकी टीम को तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं कि वह इतिहास के पन्नों में मीणाओं का गौरवशाली इतिहास खोज रहे हैं और तथ्यों के साथ आपके सामने लेकर आ रहे हैं..!

#बाहुबलीहिदाझरवाल

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