Tagged: subhadra Kumar chahuhan

ठुकरा दो या प्यार करो – सुभद्राकुमारी चौहान 0

ठुकरा दो या प्यार करो – सुभद्राकुमारी चौहान

देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं सेवा में बहुमूल्य भेंट वे कई रंग की लाते हैं धूमधाम से साज-बाज से वे मंदिर में आते हैं मुक्तामणि बहुमुल्य वस्तुऐं लाकर तुम्हें चढ़ाते...

कोयल – सुभद्राकुमारी चौहान 0

कोयल – सुभद्राकुमारी चौहान

देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली इसने ही तो कूक कूक कर आमों में मिश्री घोली कोयल कोयल सच बतलाना क्या संदेसा लायी हो बहुत दिनों के बाद आज फिर इस...

जलियाँवाला बाग में बसंत – सुभद्राकुमारी चौहान 0

जलियाँवाला बाग में बसंत – सुभद्राकुमारी चौहान

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग सा बना...

मेरा नया बचपन – सुभद्राकुमारी चौहान 0

मेरा नया बचपन – सुभद्राकुमारी चौहान

बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? ऊँच-नीच...

साध –  सुभद्राकुमारी चौहान 0

साध – सुभद्राकुमारी चौहान

मृदुल कल्पना के चल पँखों पर हम तुम दोनों आसीन। भूल जगत के कोलाहल को रच लें अपनी सृष्टि नवीन।। वितत विजन के शांत प्रांत में कल्लोलिनी नदी के तीर। बनी हुई हो वहीं...

झांसी की रानी – सुभद्राकुमारी चौहान 0

झांसी की रानी – सुभद्राकुमारी चौहान

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में...

मेरी टेक – सुभद्राकुमारी चौहान 0

मेरी टेक – सुभद्राकुमारी चौहान

निर्धन हों धनवान, परिश्रम उनका धन हो। निर्बल हों बलवान, सत्यमय उनका मन हो॥ हों स्वाधीन गुलाम, हृदय में अपनापन हो। इसी आन पर कर्मवीर तेरा जीवन हो॥ तो, स्वागत सौ बार करूँ आदर...

प्रभु तुम मेरे मन की जानो – सुभद्राकुमारी चौहान 0

प्रभु तुम मेरे मन की जानो – सुभद्राकुमारी चौहान

मैं अछूत हूँ, मंदिर में आने का मुझको अधिकार नहीं है। किंतु देवता यह न समझना, तुम पर मेरा प्यार नहीं है॥ प्यार असीम, अमिट है, फिर भी पास तुम्हारे आ न सकूँगी। यह...

स्मृतियाँ – सुभद्राकुमारी चौहान 0

स्मृतियाँ – सुभद्राकुमारी चौहान

क्या कहते हो? किसी तरह भी भूलूँ और भुलाने दूँ? गत जीवन को तरल मेघ-सा स्मृति-नभ में मिट जाने दूँ? शान्ति और सुख से ये जीवन के दिन शेष बिताने दूँ? कोई निश्चित मार्ग...

बालिका का परिचय – सुभद्राकुमारी चौहान 0

बालिका का परिचय – सुभद्राकुमारी चौहान

यह मेरी गोदी की शोभा, सुख सोहाग की है लाली. शाही शान भिखारन की है, मनोकामना मतवाली . दीप-शिखा है अँधेरे की, घनी घटा की उजियाली . उषा है यह काल-भृंग की, है पतझर...

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