ज़ुल्फ़ें

ज़ुल्फ़ें ही तो बिखरायी थी  उफ़्फ़! रात सी घिर आयी थी    निगाहें उसे तकती रही देर तक  और मदहोशी सी छायी थी    तेरी तस्वीर आँखों में हर पल  रग-२ में बस तू समाई...