Tagged: shayari

ज़ुल्फ़ें 0

ज़ुल्फ़ें

ज़ुल्फ़ें ही तो बिखरायी थी  उफ़्फ़! रात सी घिर आयी थी    निगाहें उसे तकती रही देर तक  और मदहोशी सी छायी थी    तेरी तस्वीर आँखों में हर पल  रग-२ में बस तू समाई...

अदा 0

अदा

वो अपनी अदाओं में किफ़ायत न कर सके। हम यूँ क़तल हुए कि शिकायत न कर सके।।

Almaari Se Khat Kuch Puraane Nikal Aaye 0

Almaari Se Khat Kuch Puraane Nikal Aaye

Almaari Se Khat Kuch Puraane Nikal Aaye, BeSaakhta Khoob Rone Ke Bahane Nikal Aaye… Mai Doobna Chahta Tha Sahil Ne Magar, Kaha Doobta Har Jagah Kinaare Nikal Aaye… Chaand Ko Tanhaa Samjh Liya Tha...

बहस 0

बहस

सदैव घरवाले समझाते हैं बहस से कुछ नहीं होता और “अदालते” सर्वप्रथम “बहस” ही शुरू करवाती हैं तो जाहिर सी बात हैं फैसले कैसे होंगे !!

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