Tagged: Poem

ज़ुल्फ़ें 0

ज़ुल्फ़ें

ज़ुल्फ़ें ही तो बिखरायी थी  उफ़्फ़! रात सी घिर आयी थी    निगाहें उसे तकती रही देर तक  और मदहोशी सी छायी थी    तेरी तस्वीर आँखों में हर पल  रग-२ में बस तू समाई...

इक मेहरबान आया है 0

इक मेहरबान आया है

मिरे तिमिर-ए-तंहाई मे इक आफताब आया है, चंद लम्हे बख्सने हमको इक मेहरबान आया है।   ताउम्र के लिए सजा लूँ उस मुनव्वर को दिल मे, देखकर उसको ज़ेहन मे ये ख्याल बार-बार आया...

समंदर की लहरो को 0

समंदर की लहरो को

सर्द तूफानी मौसम मे पेडो से, टूटकर गिरे पत्तो का जिक्र कहाँ है! चौतरफा सितारो से घिरे चाँद को, टूटकर गिरते इक तारे की फिक्र कहाँ है!! सुगंध फैलाती उस गुलाब की महक मे,...

इतनी आसानी से नही जा पाओगी 0

इतनी आसानी से नही जा पाओगी

चलो तुम गौर तो करती हो, मोहब्बत को छुपाकर, चुपके से जो निकल गयी, सीने से दिल चुरा कर !! तुम सोचती हो कभी सलाखों में नही आओगी, मुझसे नजरे फेर ख़यालो में नही...

"saharanpur danga" 2

तुझे इंसान से यूं जानवर बनाया किसने ??

विद्रोह का ये बिगुल बजाया किसने, तुझे इंसान से यू जानवर बनाया किसने।। कल तलक तो था तू मेरे सुख-दुख का साथी, आज तुझको यूं भड़काया किसने।। जो उठते थें हाथ कुदाल चलाने को...

0

मन पंछी हो जाना चाहता है…

पाया है मनुज गात लेकिन, मन पंछी हो जाना चाहता है, ये मस्जिद से लाया दाना, मंदिर की ड्योढ़ी पर खाना चाहता है, प्यास बुझाने को अपनी, गुरूद्वारे प्याऊ जाना चाहता है, फिर थक...

Please wait...

Never Miss Any Poetry, Join Our Family

Want to be notified when any New Poetry Published? Enter your email address and name below to be the first to know.