Tagged: Neelu Choudhary

आज की शिक्षा 0

आज की शिक्षा

मेरी आँखें नम हो जाती है शिक्षा के इस विकृत रूप को देखकर, आज शिक्षा अर्जन का ध्येय है सिर्फ सरकारी नौकर बनना ये शिक्षा मुझे ले जाती है काफी दूर… अपनी संस्कृति से,...

आसान नहीं है 0

आसान नहीं है

दिल में क्यूँ अरमान नहीं है जीवन सुर औ तान नहीं है   बेटी छोड़ी बाबा का घर पी के घर में मान नहीं है   भोले भाले समझे जाते बच्चे अब नादान नहीं...

मेहमान गए हैं 0

मेहमान गए हैं

घर आए मेहमान गए हैं क्यूँ लगता भगवान गए हैं हम फेकें वो भूखे मरते धरती से इंसान गए हैं   मौत को चुन क्यूँ लेते हैं वो क्यूँ सब छोड़ किसान गए हैं...

पति परमेश्वर 0

पति परमेश्वर

घर के सारे लोग खाकर सो चुके हैं, रात्रि की निःशब्दता ऐसी कि साँसों की आवाज भी वह सुन सकती है। अकेली जाग रही है, उस व्यक्ति के लिए जिसे सात जन्मों तक साथ...

मजा तुमको चखा देंगे 0

मजा तुमको चखा देंगे

पड़ोसी मुल्क अब सुधरो मजा तुमको चखा देंगे वतन तेरी हिफाजत में दिलों जां तक लुटा देंगे   मरे जो गोलियां खाकर किसी का लाल भी है वह भला उसकी शहादत को यहाँ कैसे...

किसको गले लगाऊँ मैं 0

किसको गले लगाऊँ मैं

रोऊँ या फिर हास करूँ मैं? किसको गले लगाऊँ मैं? खुशियां आयी दामन में भर, गम का साया साथ चला है। कुछ रूठे, कुछ बिछुड़े पल में, कुछ नव जुड़ आए इस पथ में!...

औरत का कर्ज 0

औरत का कर्ज

कितनी मुखर थी वह! अपनी बातों को दूसरों के समक्ष रखने में पूर्ण सक्षम!! गोत्र क्या बदला पूरा व्यक्तित्व ही बदल गया उसका। हर गलत का विरोध करने वाली बहिर्मुखी लड़की एकाएक… अंतर्मुखी औरत...

मत पूछो 1

मत पूछो

पीते कैसे हैं इतना गम मत पूछो फिर क्यूँ ना आँखें होती नम मत पूछो   बढ़ते दामों से जीते जी मर जाते हम फिर भी है त्यौहार का आलम मत पूछो   अब...

यूँ मत करो प्रकृति का चीर हरण 0

यूँ मत करो प्रकृति का चीर हरण

यूँ मत करो प्रकृति का चीर हरण विषाक्त हुआ पर्यावरण बारूदों के ढेर पर बैठ क्यूँ मानव हो रहा मगन बढ़ गया भू का तपन खतरे में है सारा जीवन कल कारखाने कर रहे...

मैं लड़की हूँ 2

मैं लड़की हूँ

मैं जानती हूँ मैं मानती हूँ मैं न समाधान होने वाली अंतहीन समस्या हूँ … क्योंकि मैं एक लड़की हूँ। जब मैं पैदा हुई ना खुशियाँ ला सकी ना गम ज्यों-ज्यों बड़ी होती गई...

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