Tagged: Kvishala

चाँदनी-सी झिलमिली थी रातभर 0

चाँदनी-सी झिलमिली थी रातभर

चाँदनी-सी झिलमिली थी रातभर आप की खिडकी खुली थी रातभर एक तनहा बेदिली थी रातभर शम्‍म बुझ-बुझकर जली थी रातभर सिसकियाँ फिर आज बस्ती ने सुनी फिर कहीं चुनरी ढली थी रातभर आँच दामन...

एक उजाला 0

एक उजाला

है अँधेरा जिंदगी में हर तरफ,हर छड़ हर घड़ी जिंदगी में अब एक नया उजाला होना चाहिए है तमाशा जिंदगी में हर लम्हा हर वक्त हर समय अब तो हमारी भी तकदीर बदलनी चाहिए...

जिंदगी का सफर 0

जिंदगी का सफर

अंतर्मन से अपने कुछ ऐसी आवाज सुनो जिंदगी के सफर में अब यु ही निकल पड़ो किसी रोज किसी सफर में हम ऐसे निकल पड़े वही भीड़ उतने ही लोग,हमे मिलते चलते गये हर...

ये हाँ शब्द .. 0

ये हाँ शब्द ..

यूँ तो कई मर्तबा सुना हूँ…ये “हाँ ” शब्द.. पर  तुम से…कभी नहीँ.. क्यू इतना बड़ा होता  है ,ये हाँ  शब्द…इसे और छोटा होना चाहिये.. और थोड़ा सरल भी….ताकि बोलते बोलते रुकने की गुंजाइश...

बालिका से वधू – रामधारी सिंह “दिनकर” 0

बालिका से वधू – रामधारी सिंह “दिनकर”

माथे में सेंदूर पर छोटी दो बिंदी चमचम-सी, पपनी पर आँसू की बूँदें मोती-सी, शबनम-सी। लदी हुई कलियों में मादक टहनी एक नरम-सी, यौवन की विनती-सी भोली, गुमसुम खड़ी शरम-सी। पीला चीर, कोर में...

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