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कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं 0

कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं

शब्द नए चुनकर, गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं, विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार...

बहस 0

बहस

सदैव घरवाले समझाते हैं बहस से कुछ नहीं होता और “अदालते” सर्वप्रथम “बहस” ही शुरू करवाती हैं तो जाहिर सी बात हैं फैसले कैसे होंगे !!

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नई कविता नया संग्रह

कबीरा बातों से तेरी, मैं ख़ुद को ख़ोज लाया हूँ ग़ालिब तेरे शेरो से, मैं दुनियाभर में छाया हूँ मेरी कोई नहीं मंजिल, मैं बस राहों पर चलता हूँ अब उड़ भी जाऊ तो...

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उम्मीद

उम्मीद मुझे है ये, कल एक नया सवेरा लेकर आयेगा, इन फैले अंधियारो में, सूरज प्रभात की किरणें लेकर आयेगा, कल जब मै जागूंगा, एक नयी प्रभा के दर्शन होंगे, मेरी पलकों के कोरो पर,...

एक कविता ‘कविता’ के लिए  0

एक कविता ‘कविता’ के लिए 

जब मन की कश्मकश  को जुबाँ से नहीं जता पाती हूँ मैं, हाँ तभी! ठीक तभी तुम याद आती हो, तेरे साथ असहनीय पीड़ा भी, आसानी से सह जाती हूँ मैं, किसी और को...

एक घर सपनो का 0

एक घर सपनो का

याद होगा हमारा वो सपनो का घर, घर के बाहर तुम्हरी नाम प्लेट, जिसमे तुम्हरे नाम के आगे डॉ. लगा हुआ था, वो लाल रंग का दरवजा, जिसकी चाबी में छल्ला पिला था, पीले...

मैं जानता हूँ, मेरे हर कदम पर नजर है तेरी 0

मैं जानता हूँ, मेरे हर कदम पर नजर है तेरी

ऐ चांद… मैं जानता हूँ, मेरे हर कदम पर नजर है तेरी, तू भले ही दूर हो, फिर भी मोहब्बत है मेरी, जानता हूँ तू पढ़ रही हैं मेरे हर शब्द, जो घुमा फिरा...

इतनी आसानी से नही जा पाओगी 0

इतनी आसानी से नही जा पाओगी

चलो तुम गौर तो करती हो, मोहब्बत को छुपाकर, चुपके से जो निकल गयी, सीने से दिल चुरा कर !! तुम सोचती हो कभी सलाखों में नही आओगी, मुझसे नजरे फेर ख़यालो में नही...

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