Tagged: Kavishala

इतना सा वर 0

इतना सा वर

प्रभु मेरे एक दर्शन वांछनीय है लख कर प्रभु का सौंदर्य मेरे नयन तृप्त हो जाऐंगे मेरी श्रद्धा अगर दो बूंद अश्रु बन गई हो तो दर्शन दो या अश्रु मेरे धूल में मिल...

एक किरण बस भोर की 0

एक किरण बस भोर की

रात बोझल सी क्यूँ बैठी? दिन ही है आ जाएगा एक किरण बस भोर की और फिर प्रकाश छा जाएगा आग है मसान की ये, जल्द ही बुझ जाएगी ज्योत नवजीवन की फिर से...

मज़ा आता है 0

मज़ा आता है

हमें तो मुहब्बत ही में मज़ा आता है, अब कहाँ ज़िन्दगी में मज़ा आता है । आदत छूट गई तेरी गोद में पड़े रहने की, अब तो तेरी बेरुखी में मज़ा आता है ।...

बस खा गए धोखा 0

बस खा गए धोखा

मुझे लगता था जो दिल है, वहीं बस खा गये धोखा ये तेरे ग़म की महफ़िल है, यहीं बस खा गये धोखा जो कहते थे ये तेरा है, वो अब हैं कहाँ जाने मेरा...

कुछ यादें – कुछ सपने 0

कुछ यादें – कुछ सपने

 ” बस वही यादें “ यादें एक सरल शब्द है, केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें, कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें | मिलना और मिल के बिछड़ना , तस्वीरें देख...

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी 0

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी घूमने गया है कहीं चाँद मेरे शहर का उफ़ान पर है संमदर देख स्याहा काली रात घुसने को है पानी घर में उँची उँची लहर का...

लौहपथगामिनी 0

लौहपथगामिनी

वह चलती साँप सी सारा रास्ता नापती रेंगती बलखाती हुई हर मंजिल पीछे छोड़ जाती हुई हवाओं में छोड़ा धुआँ छुक-छुक सा फिर स्वर हुआ   वह चलती सरिता समान शहर, गाँव या हो...

ज़िंदा रहेने में 0

ज़िंदा रहेने में

जीने में……. और ज़िंदा रहेने में बहुत फ़र्क़ है भाई ! साँसों के चलने को जीना समझ लेते हैं और चलते रहते हैं अपने ही शरीर का बोझ उठाकर ज़रूरी नहीं कि जलाया नहीं...

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