Tagged: Kavishala

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है – गुलज़ार 0

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है – गुलज़ार

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है चाँद की किरणों...

पूरा दिन – गुलज़ार 0

पूरा दिन – गुलज़ार

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर रोज़ मिलता है मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है, झपट लेता है, अंटी से कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने की आहट भी नहीं...

वैभव के अमिट चरण-चिह्न – अटल बिहारी वाजपेयी 0

वैभव के अमिट चरण-चिह्न – अटल बिहारी वाजपेयी

विजय का पर्व! जीवन संग्राम की काली घड़ियों में क्षणिक पराजय के छोटे-छोट क्षण अतीत के गौरव की स्वर्णिम गाथाओं के पुण्य स्मरण मात्र से प्रकाशित होकर विजयोन्मुख भविष्य का पथ प्रशस्त करते हैं।...

कवि आज सुना वह गान रे – अटल बिहारी वाजपेयी 0

कवि आज सुना वह गान रे – अटल बिहारी वाजपेयी

कवि आज सुना वह गान रे, जिससे खुल जाएँ अलस पलक। नस–नस में जीवन झंकृत हो, हो अंग–अंग में जोश झलक। ये – बंधन चिरबंधन टूटें – फूटें प्रासाद गगनचुम्बी हम मिलकर हर्ष मना...

धन्य तू विनोबा ! – अटल बिहारी वाजपेयी 0

धन्य तू विनोबा ! – अटल बिहारी वाजपेयी

जन की लगाय बाजी गाय की बचाई जान, धन्य तू विनोबा ! तेरी कीरति अमर है। दूध बलकारी, जाको पूत हलधारी होय, सिंदरी लजात मल – मूत्र उर्वर है। घास–पात खात दीन वचन उचारे...

स्वाधीनता के साधना पीठ – अटल बिहारी वाजपेयी 0

स्वाधीनता के साधना पीठ – अटल बिहारी वाजपेयी

अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए काम करते-करते, मृत्यु का वरण करना सदैव ही स्पृहणीय है। किन्तु वे लोग सचमुच धन्य हैं जिन्हें लड़ाई के मैदान में, आत्माहुति देने का अवसर प्राप्त हुआ है।...

न दैन्यं न पलायनम्. – अटल बिहारी वाजपेयी 0

न दैन्यं न पलायनम्. – अटल बिहारी वाजपेयी

कर्तव्य के पुनीत पथ को हमने स्वेद से सींचा है, कभी-कभी अपने अश्रु और— प्राणों का अर्ध्य भी दिया है। किंतु, अपनी ध्येय-यात्रा में— हम कभी रुके नहीं हैं। किसी चुनौती के सम्मुख कभी...

मैंने जन्म नहीं मांगा था! – अटल बिहारी वाजपेयी 0

मैंने जन्म नहीं मांगा था! – अटल बिहारी वाजपेयी

मैंने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की मांग करुँगा। जाने कितनी बार जिया हूँ, जाने कितनी बार मरा हूँ। जन्म मरण के फेरे से मैं, इतना पहले नहीं डरा हूँ। अन्तहीन अंधियार ज्योति...

हिरोशिमा की पीड़ा – अटल बिहारी वाजपेयी 0

हिरोशिमा की पीड़ा – अटल बिहारी वाजपेयी

किसी रात को मेरी नींद चानक उचट जाती है आँख खुल जाती है मैं सोचने लगता हूँ कि जिन वैज्ञानिकों ने अणु अस्त्रों का आविष्कार किया था वे हिरोशिमा-नागासाकी के भीषण नरसंहार के समाचार...

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