Tagged: Hindi Poetry

मेहमान गए हैं 0

मेहमान गए हैं

घर आए मेहमान गए हैं क्यूँ लगता भगवान गए हैं हम फेकें वो भूखे मरते धरती से इंसान गए हैं   मौत को चुन क्यूँ लेते हैं वो क्यूँ सब छोड़ किसान गए हैं...

शीतयुद्ध 0

शीतयुद्ध

जब सोचु, तेरे बारे में तू कहता, तू तेरे तकरार में शीतयुद्ध, स्वयं से करू तर्क-वितर्क, पहर-पहर करू

मौत 0

मौत

जिंदगी का मंजर अभी अधूरा है, मौत दूर ही रहना देखना अभी पूरा है खुशनुमा जिंदगी की तुम खामोशी हो तुम प्रारंभ हो, फिर भी तुम दोषी हो जिंदगी से नहीं परहेज हमें, ना...

मौत को डराओ,खुद नहीं 0

मौत को डराओ,खुद नहीं

हवाओं से जाकर कह दो, अपना रुख मोड़ लें, मौत गर आनी है तो आजाएगी, चलो अभी से कफन की चादर ओढ़ लें। यूँ दुश्वारी में जीना कब तक मुनासिब होगा, ऐ ‘विशाल’, मल्लाहों...

मौत 0

मौत

मौत से बातें चार कर के देखेंगे, इश्क़ फिर एक बार कर के देखेंगे।  

मौत अंत नहीं अंधकार घनेरा, 0

मौत अंत नहीं अंधकार घनेरा,

अस्तित्व भी भटक गया महेंद्र, जहाँ पर है सूखा, बरसना भूल गये बादल, यहाँ पर है रूखे सूखे काँटे कटीलें क्षुप घनेरे जाने इनके ! कौन से है सहारे ।। ये मृत्यु तो नहीं,बस...

बन के रहना  0

बन के रहना 

सेहरा की दोपहर में नमी बन के रहना आदमी को मुश्किल है आदमी बन के रहना मैं बरसूंगा एक दिन आखिरी बूँद तक तुम खेत सी सूखी ज़मी बन के रहना तस्वीर ज़िन्दगी की...

मेरी आँखों में । 0

मेरी आँखों में ।

मेरी आँखों में दास्तानें बहुत हैं, नए तो नहीं पर पुराने बहुत हैं । दिल के हालात लिखता रहा हूँ, सो मेरी ग़ज़लों के माने बहुत हैं । कम ही रहा है वफ़ा का...

दरख्तों के झुरमुट से.. 0

दरख्तों के झुरमुट से..

कौन है ये,दरख़्तों के झुरमुट से,यूँ झाँक रहा है, हो निर्निमेष,अपलक, मुझे यूँ ताक रहा है। कौन है जो, छद्मवेश में ,श्वेत रोशनी बाँट रहा है, हो कृपाण,घोर निशा को, अनवरत यूँ काट रहा...

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