Tagged: Hindi Poetry

पिया जो तुम परदेश गए 0

पिया जो तुम परदेश गए

की पिया जी…. जब से गए परदेश पिया तुम, छोड़ के पीछे मोहे, सारि उमरिया रो रो बिता दी, सुध बुध पूछे न कोई…….. की साजन साजन मैं करू साजन मिलिया ना कोई, नैना...

उसने अपने पंखो को फैलाया… और वो उड़ चला… 0

उसने अपने पंखो को फैलाया… और वो उड़ चला…

उसने अपने पंखो को फैलाया, हवाओं को चिर कर पर कर जाने दिए अपना सीना, बदलो के पार् झाक कर, घाटी का अनुमान लगाया. वर्तमान की पगडंडियों को छोर आज वो उड़ने वाला था...

मैं जननी हूँ 0

मैं जननी हूँ

ना हूँ काली ना ही लक्ष्मी ना ही हूँ मैं सरस्वती हूँ मैं इक साधारण नारी करती हूँ पर बात मैं सच्ची हूँ मैं जननी करो ना अनादर ना करो इतना अपमान है माँ...

ये दिन ढला वो रात हुयी 0

ये दिन ढला वो रात हुयी

ये दिन ढला वो रात हुयी, समां बदलता जाता है, जो सुबह थी, वो शाम हुयी। ये बचपन था , वो भागी जवानी, ये सुबह थी ,वो शाम सुहानी, अब ढलते दिन पर रात...

“माँ” – हाँ आज दिन तो आपका है 0

“माँ” – हाँ आज दिन तो आपका है

हाँ आज दिन तो आपका है, मगर उनकी वजह से… जिस “माँ” ने न जाने… न जाने… कौन से दर्द सहे है कौन कौन सी बाते सही… मगर उसकी एक मुस्कान ने सब कुछ…...

माँ मेरे दिन कब फिरे 0

माँ मेरे दिन कब फिरे

नरम नरम हाथ तेरे, मेरे गेसुओं में हलके फिरे। लगता है ऐसे जैसे नदिया की कोई धार फिरे। ठंडा सा अहसास कराता तेरा यु दुलार करना। “माँ” तेरी गोदी में सोने के मेरे दिन...

मोहब्बत कर ली है। 2

मोहब्बत कर ली है।

इतनी ताज़ी हवा लग रही है। जैसे जुल्फे तू झटक रही है।। उनसे भीनी कई खुशबुएँ। इस जहाँ में महक रही है।। जुल्फे है या कोई पंख फैला। उड़ने को ये पंछी बिफरे है।।...

ये दिल कबूतर है 2

ये दिल कबूतर है

ये दिल कबूतर है फुर्र हो जायेगा। कभी आस्मां मैं उन्मुक्त कही उड़ जायेगा।। कभी ओट लिए पलाश के लाल पीले फूलो में। कभी किसी और का दिल हो जायेगा।। कोई मंतर कर देता...

Please wait...

Never Miss Any Poetry, Join Our Family

Want to be notified when any New Poetry Published? Enter your email address and name below to be the first to know.