Tagged: Hindi Poetry

हम तो मुसाफिर ठहरे। 0

हम तो मुसाफिर ठहरे।

शहर उनका गली उनकी। हम तो राहगीर ठहरे।। आने जाने वाले परिंदे की तरह। हम तो मुसाफिर ठहरे।। कुछ पल ठहर गए थे। हम शायद किसी के मकान में।। कुछ अदा किया कुछ बाकि...

मुक्कमल मुकाम मिल जाए 0

मुक्कमल मुकाम मिल जाए

सूरज ढल जाए। कभी शाम हो जाए। छत पे हम दोनों की कभी मुलाकात हो जाए।। तुझे थाम के बैठु कभी सीने के भीतर। पहरो में बीतते हुए कभी रात हो जाए।। तेरी पलकों...

शहर उनका गली उनकी 0

शहर उनका गली उनकी

शहर उनका गली उनकी। हम तो राहगीर ठहरे।। आने जाने वाले परिंदे की तरह। हम तो मुसाफिर ठहरे।। कुछ पल ठहर गए थे। हम शायद किसी के मकान में।। कुछ अदा किया कुछ बाकि...

गुजर ही जाये 0

गुजर ही जाये

तब तक चलेगी ये हवा मुझ पे। जब तक की तेरी खुशबु दिल में उतर न जाये। उतर न जाना तू छत से दिलबर कही ये दिल मेरा फिर बेठ न जाये।। कहता हु...

मैं समझूँ क्या। 0

मैं समझूँ क्या।

इतनी ताज़ी हवा लग रही है। जैसे जुल्फे तू झटक रही है।। उनसे भीनी कई खुशबुएँ। इस जहाँ में महक रही है।। जुल्फे है या कोई पंख फैला। उड़ने को ये पंछी बिफरे है।।...

चाहते मेरी में इस कदर मांगू 0

चाहते मेरी में इस कदर मांगू

चाहते मेरी मैं इस कदर मांगू। दे दे हर कोई एक प्यारी जिद समझ कर।। हे नहीं नई कुछ तो तेरे अलावा। हर सजदे में तेरी ही मैं दुआ मांगू।। तू आज कल मेरा...

पेड़ के नीचे छाँव तले। 0

पेड़ के नीचे छाँव तले।

पेड़ के नीचे छाँव तले। जब आधी-आधी रात ढले।। चाँद खिले जब सूरज ढले।। फिर आधी पूरी रात चले।। कुछ और मवेशी खड़े हुए है। कुछ पंछी उन पर उमड़ रहे है।। कुछ किट...

ये दिल की है शरारते

ये दिल की है शरारते

जर्रे से खनक कर कुछ सिक्के गिर रहे है। कुछ पत्तो की सरसराहट है। कही दबी हुई नमी उस रुख पेड़ की। तलहटी मैं जश्न मना रही है।। क्यों अक्सर इन्ही बातो का जिक्र...

नया इतिहास बना दो 0

नया इतिहास बना दो

जपकती हुई आँखों में ये नींद चली आयी। रात ढल गयी ना जाने क्यों भोर चली आयी।। किरण चल पढ़ी है पहाड़ ऊंघ रहा है जिस पर। सरपट दौड़कर पंक्ति पंछियो की चली आयी।।...

Please wait...

Never Miss Any Poetry, Join Our Family

Want to be notified when any New Poetry Published? Enter your email address and name below to be the first to know.