Tagged: Akib Javed

खंजर छुपाये बैठा कोई जान मुश्किल में हैं 0

खंजर छुपाये बैठा कोई जान मुश्किल में हैं

गनीमत हैं कि वो फूल अभी खिला नही हैं खंज़र छुपाये बैठा कोई जान मुश्किल में हैं।। याद आती हैं, दुआएँ अब माँ की मेरी आज जान मेरी कितनी मुश्किल में हैं।। बदसलूकी की...

एक शम्मा जलाया था तेरे मुहब्बत का हमने 0

एक शम्मा जलाया था तेरे मुहब्बत का हमने

एक शम्मा जलाया था तेरे मुहब्बत का हमने उस दिन के इंतज़ार में अब जाँ मचलती है। मेरे महबूब तू आ जा अब मेरे सामने वो सच्ची मुहब्बत अब आँखों में झलकती है। खुद...

आईने में नज़र मिला के!! 0

आईने में नज़र मिला के!!

यहाँ उठते हैं ऊपर,लोग जमीर गिरा के गिरते हैं अक्सर,आईने में नज़र मिला के बनकर कठपुतली यहाँ लोगो के हाथों करते चापलूसी,अपनी आत्मा गँवा के दोष नही अब हवाओं का फ़िज़ा में कोई खूब...

राम अपना करीम अपना 0

राम अपना करीम अपना

सपने अपने दर्पण अपना होगा खुदा भी राज़ी उनका मेहनत करते रहते दिन-रात हासिल उनका बाकी उनका सर्द हवाएं अब ऋतु है गर्म माजी अपना काजी उनका जलती बुझती है एक मोम आग भी...

एल्बम 0

एल्बम

छण छण गतिमान जिंदगी का पहिया उस पहिये को यादो के रूप में समेट के रखती है चाहे अच्छा लम्हा हो या कि हो कोई बुरी याद कभी किसी में भेद नही कभी हमको...

यूँ तेरी जुल्फ़े निहारी जा रही है 0

यूँ तेरी जुल्फ़े निहारी जा रही है

मेरे हर सोच में तेरा शय शामिल किस्मत हमारी सँवारी जा रही हैं जिंदगी हो गयी हैं रंगमंच की तरह जैसी भी हो अब गुज़ारी जा रही हैं वो सर्द रात और तेरा अहसास...

धड़कन 0

धड़कन

मेरी हर साँसों मे सिर्फ अब तेरी ही रवानी है… तुझे देखू सिर्फ तेरी ही कहानी है…. दिल की हर धड़कन में अब तू ही धड़क रही है…. हर अहसास में तुझे पाता हूँ…...

हमारी मुहब्बत सिमटी है 0

हमारी मुहब्बत सिमटी है

एक शम्मा जलाया था तेरे मुहब्बत का हमने उस दिन के इंतज़ार में अब जाँ मचलती है। मेरे महबूब तू आ जा अब मेरे सामने वो सच्ची मुहब्बत अब आँखों में झलकती है। खुद...

असर है प्यार की रजाई का 0

असर है प्यार की रजाई का

जब नज़र पडी मेरी किसी के बुराई पर खुद पे ना ध्यान दिया अपनी परछाई का बादलों की छटा और मौसम पुरवाई का याद आता हैं दौर किसी के रुसवाई का बेहाल दिल को...

ग़ज़ल!!सफर में भी जिंदगी लेती हैं इम्तिहाँ अपना!! 0

ग़ज़ल!!सफर में भी जिंदगी लेती हैं इम्तिहाँ अपना!!

अपनी तबाही का ऐसे जश्न यूँ मानाती हैं सफर में भी जिंदगी लेती हैं इम्तिहाँ अपना।। दिल की धड़कनों पे हैं अब किसी का हक हैं उस निशां पे हम कैसे सजाये आशियाँ अपना।।...

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