Tagged: Akib Javed

हिन्द के निवासी हैं, फख्र करेंगे 0

हिन्द के निवासी हैं, फख्र करेंगे

हिन्द के निवासी हैं,फख्र करेंगे देश के लिए जियेंगे,मर मिटेंगे ये दौलत,जवानी कुर्बान करेंगे देश के लिए हम नग़मे लिखेंगे तिरंगे को शान से,हाथो में थामेंगे सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां पढ़ेंगे ख़ाखे ज़माने...

चुपके चुपके देखकर जो दिल लगाना हैं 0

चुपके चुपके देखकर जो दिल लगाना हैं

चुपके चुपके देखकर जो दिल लगाना है यूँ ही हमको ऐसे ही,क्या अब सताना है।। वो दिल का रिस्ता पुराना तुमसे निभाना है ये ग़मो का मौसम तो यूँ आना जाना है।। वो ग़मो...

माँ 0

माँ

ज़िन्दगी में जिसके माँ नही होती है उनसे पूछो माँ की कमी क्या होती है।। जब आफ़त मेरे सर पे आन पड़ती है सिखाई माँ की सीख याद पड़ती है।। आँधियों में भी चरागों...

सजदों में लज़्ज़त ना थी…मेरी दोस्ती से पहले 0

सजदों में लज़्ज़त ना थी…मेरी दोस्ती से पहले

तुझे कोई जानता ना था…मेरी दोस्ती से पहले तेरी जिंदगी रोशन कहाँ थी…मेरी बंदगी से पहले तेरी सादगी कहाँ थी..मेरी हाज़री से पहले तू खुदा कहाँ था ऐसा…मेरी बंदगी से पहले फ़िज़ा में रंगीनियाँ...

मुस्कान 0

मुस्कान

मन को अपने साधो दुखड़ा किसी से ना बाँटो सब लोगो की सुनते हैं पीठ पीछे बाते बुनते हैं चेहरे में इक हँसी रखो दिल में कोई ख़ुशी रखो लोगो को यही भाता हैं...

अकेला 0

अकेला

हर राह,हर गली, हर मोड़,हर सड़क हर चाह,कोई हमसफर मत भूल तू पथिक निडर चलता जायेगा तू हरदम यूँ ऐसे अकेला ही चल जिंदगी के इस पथ पर तू अब घर से निकल नए...

तुझे शर्म आनी चाहिये!! 0

तुझे शर्म आनी चाहिये!!

अपने शह्र में एक पुरानी रिवायत होनी चाहिये आने वाले दुश्मनो की मेजबानी होनी चाहिये होते दंगे,खूब पंगे,लोग भी हैं भूखे नंगे ए अमीर ए शह्र तुझको शर्म आनी चाहिये गर बंदा परवरदिगार हैं...

कुछ बिखरे किस्से याद आ गए!! 0

कुछ बिखरे किस्से याद आ गए!!

नींद के आगोश में जो हम आ गए कुछ बिखरे हुए किस्से याद आ गए राजदां थे वो,जो कल तक जिस हवेली में जर्जर हवेली देख,पुराने किस्से याद आ गए हम घुमा करते थे...

मुहब्बत के फ़लसफ़ा में ये कहानी होनी चाहिये!! 0

मुहब्बत के फ़लसफ़ा में ये कहानी होनी चाहिये!!

सोच में तुमको ही सोचूँ,सोच ये होनी चाहिये मुहब्बत के फ़लसफा में ये कहानी होनी चाहिये तेरे मेरे इश्क की,कोई पुरानी निशानी चाहिये चाँद तारो के जैसे,कोई गवाही होनी चाहिये फूलो के बागों में...

अश्क़ का वो कतरा अब कहाँ मेरे हासिल में हैं 0

अश्क़ का वो कतरा अब कहाँ मेरे हासिल में हैं

रंजो गम की दुनिया में वो मेरे महफ़िल में हैं लाख छुपाये प्यार मुझसे वो अब मेरे दिल में हैं।। लाख हालात मेरे मुश्किल सही राब्ता तो हैं हाथो में हाथ उसके साथ नज़र...

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