Tagged: Akib Javed

गूँज उठेगी धरती सारी अब जयहिंद के नारों से 0

गूँज उठेगी धरती सारी अब जयहिंद के नारों से

गूँज उठेगी धरती सारी अब जयहिंद के नारों से। काँप उठेंगे दुश्मन सारे अब सैनिक के इशारो से।। भुजा में ताकत,मुस्कान लिए ना डरते कटारों से।।। देश की आन बान को हरदम तैयार रहते वारो...

ज़िन्दगी की चादर फैलाई 0

ज़िन्दगी की चादर फैलाई

ज़िन्दगी की चादर फैलाई निकली अब चादर हरजाई सूनी आँख ख्वाब गायब रात भर यूँ नींद ना आई ज़िन्दगी यूँ फिसलती रही बन्द घड़ी कुछ ना बताई ज़िन्दगी का सफर करना है हर सफर...

ख्वाबो में इश्क की लौ जली हो जैसे 0

ख्वाबो में इश्क की लौ जली हो जैसे

  कोई उम्मीद तेरे दिल में दबी हो जैसे ख्वाबो में इश्क की लौ जली हो जैसे गुंचे गुंचे खिले फूलो को यूँ देखा हमने कँही प्यार की बयार अब चली हो जैसे वो...

ज़िन्दगी की चादर को गिरा देखा!! 0

ज़िन्दगी की चादर को गिरा देखा!!

  सनम की आँखों में आँसू आता देखा दिल की धड़कन को धड़कता देखा मुश्किल थी तड़प,ये कसक उनकी यूँ विरह की पीड़ा से तड़पता देखा यूँ उनकी घनी ज़ुल्फो में ही हो शाम...

खुदा की शान से बढ़ते हौसला देखा 0

खुदा की शान से बढ़ते हौसला देखा

हालात को मुश्किलों में फसा देखा कस्ती को भँवरों से निकलता देखा साने इलाही का करिश्मा रहा हमपर खुदा की रहमत से यूँ अब नफ़ा देखा ज़िन्दगी में उथलपुथल रही यूँ ऐसे खुदा के...

उनकी नज़रो को देखकर जान निकल जाए 0

उनकी नज़रो को देखकर जान निकल जाए

मुद्दतो बाद ऐसे मेरा दिल अब मचल जाए उनकी नज़रो को देखकर जान निकल जाए बेकरारी ही बेकरारी छाई दिल में मेरे बेबसी से मेरे कँही ये दिन ना ढल जाए खो गए हम...

छोड़ दे 0

छोड़ दे

ऐ मेरे दोस्त तू मेरा दिल दुखाना छोड़ दे लब पे मेरे नाम को अब दबाना छोड़ दे दिल के अहसासों को तू कभी समझा नही अब यूँ झूठ मूठ का रीझना मनाना छोड़...

पता है मुझे 0

पता है मुझे

  अनसुलझा हुआ सा हूँ थोड़ा सुलझा दो मुझे भी कंही खोया हुआ सा हूँ खुद से मिला दो मुझे भी .. नही मिला पाओगे मुझे मुझमे ही डूब जाओगे हां पता है मुझे…....

उनको याद करना सजा हो गया 0

उनको याद करना सजा हो गया

उनकी याद का अब नशा हो गया उनको याद करना सज़ा हो गया हम बेखबर रहे,दिल के खबर से यूँ एकदूसरे का अब नशा हो गया बस कर साँसों में,दिल से निकाला दिये सारे...

जर्रे जर्रे में है साया तेरा, लगता हर बार नया है 0

जर्रे जर्रे में है साया तेरा, लगता हर बार नया है

जर्रे जर्रे में हैं साया तेरा,लगता हर बार नया है मुश्किलातों का किया सामना,मंज़र यूँ नया है तकलीफों को भूलते,फिर दर्द हर बार नया है ज़ख्म भी देते हैं, लेकिन दवा हर बार नया...

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