The School Of Poets

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Recent Poetry

चलो फिर एक सुंदर सा हिंदुस्तान बनाए.

चलो फिर एक सुंदर सा हिंदुस्तान बनाए…… मिटा दे देश के दुश्मनों को जड़ से। चलो फिर एक सुंदर सा हिंदुस्तान बनाए ।। लटका के फांसी पर बलात्कारियो , गद्दारो, आतंकियों को । चलो...

Written By Abhishek Gupta | Your Feedback

देश विरोधी बाते भी जब तुमको अच्छी लगने लगती है ।

देश विरोधी बाते भी जब तुमको अच्छी लगने लगती है । देश की मिट्टी भी जब तुमको अपने सीने पे चुभने लगती है । देश गीत गाना भी जब तुमको अपना अपमान लगे ।...

Written By Abhishek Gupta | Your Feedback

कहाँ है माँ तू

माँ तू कहाँ है चली कहाँ गई है छोड़ के मुझको लौट के आजा वापस मत देना तू रोटी अकेली है तेरी बेटी अँधेरे से डर है लगता अपने ही घर में दिल है...

Written By Vandana Dave | Your Feedback

कोई कभी भी खराब हो सकता है

कोई कभी भी खराब हो सकता है पानी भी तो शराब हो सकता है। हर वक्त वो इतना खुश दिखता है वो हँसना भी नकाब हो सकता है। सही तालीम औ परवरिश जुरुरी हैं...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

उसको कभी अश्क़बार देख

कोई खबर भी सुन ले या फिर इश्तेहार देख सब झूठ का ग़ुबार है तू जितनी बार देख बर्बादियों में लुत्फ़ बहुत आएगा तुझे इस दिल को करके तू भी कभी बेक़रार देख दुनिया...

Written By Danishmohd khan | Your Feedback

आईना मेरा मुझसे हर वक्त कहता है

आईना मेरा मुझसे हर वक्त कहता है मेरे घर में अब कोई और रहता है। कब्र पे चढ़े गुलाबों की क्या खता किसी और का दर्द कोई और सहता है। ये ऊँची इमारतें बनीं...

Written By nilabh Singh | Your Feedback

मैं साथी हुं आज़ाद विचारो का

मैं साथी हुं आज़ाद विचारो का मैं शत्रू हुं धर्म के ठेकेदारो का मैं हल हुं सियासत के बीमारो का मैं रक्षक हुं ,मूल अधिकारो का मैं भारत का सविधान बोल रहा हुं हां...

Written By Shaan Muhammad Salaivi | Your Feedback

नया हिन्दुस्तान

 प्यारा न्यारा  दिखता है मुझको हिन्दुस्तान नया जनमानस करता माँ भारती का गुणगान यहाॅ राष्ट्रहित ही राष्ट्र धर्म है राष्ट्रीयता प्रतिष्ठावान यहाॅ क्रान्तिवीरो और शूरवीरो का त्याग बलिदान यहाॅ संपन्नता आत्मनिर्भरता का स्वयं किया...

Written By Ashok Dhanpal Singh | Your Feedback

आज़ादी…

अपनों पर मर मिटने वालों,आज़ादी यूँ ही नहीं कमाई है, उस सरहद पर जाने वाला भी, किसी का बेटा और भाई है, ये ग़लत है, यहाँ कमी है,अक़्सर ये कह जाते हो, बोलो उसे...

Written By Nikki Mahar | Your Feedback

आज़ाद कलम

आज़ाद हुए अंग्रेजों से हम,दुश्मन अब काली नियत वाले हैं, साम्प्रदायिकता,भ्रष्टाचार के जाल जिन्होंने डाले हैं, फंसकर इन जालों में हम खुद “हम” का भाव भुलाते हैं, पकड धर्मं-मज़हब की बाहें, बाँट मुल्क़ को...

Written By Nikki Mahar | Your Feedback

आजाद है हम

Azad hain hum Azad hain hum Shaheedo ki qurbani hain, Veeroki faryaad hain hum Azad hain hum……….. Bismil ka wo geet hain hum, Tagore ka raag hain hum Hum hain veer bhagat singh, Wo...

Written By Danishmohd khan | Your Feedback

मैं हिंदोस्तां बोल रहा हूँ…

मैं हिंदोस्तां बोल रहा हूँ… मैं टूटता रहा तुम बिखरते गये, कभी प्रदेश बटाँव में कभी जाती भेद भाव में|   कितने शहीदों से सिंची थी ये धरती, जब जब जालिमों ने लुटा, गद्दारों...

Written By Wasim Shahagadi | Your Feedback

आज़ादी

नाम की है आज़ादी किस काम है आज़ादी वो और थे… कुछ अलग ही खून था उनमें जो शहीद हो गए इस देश क लिए एक जूनून था उनमें अब तो बस व्हाट्सएप की...

Written By Dilip Rangwani | 2 Comments

बाज़ार…

कब हमें हमारा जंगल मिलेगा?, कब तक हम यूँ ही उगते फिरेंगें? रोज़ दिन बीतने की गति में….मैं.. बार-बार बोया गया बीज की तरह। अब मैं हर कहीं उगता फिरता हूँ… बार-बार पैदा होने...

Written By Manav Kaul | Your Feedback

तुम तो क्रान्ति लाने निकले थे ना

तुम तो क्रान्ति लाने निकले थे खाली हाथ वापस आ गए नहीं मिली क्या मुझे पता है तुम कहोगे कि तुमने पूरी कोशिश की लेकिन सब सो रहे थे तो भाई जगाते लोगों को...

Written By Aseem Trivedi | Your Feedback

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