मंज़िलें उनकी, रास्ता मेरा – अस्तित्व ‘अंकुर’

मंज़िलें उनकी, रास्ता मेरा

लेखक: अस्तित्व ‘अंकुर’

Buy Now: Rs. 139/-

(Book Price: 99/- + Delievery Chanrge: 40/-)


‘मंज़िलें उनकी, रास्ता मेरा’ कविशाला की तरफ से किसी व्यक्ति विशेष का पहला काव्य संकलन है ! यह संकलन अस्तित्व ‘अंकुर’ की रचनावली है ।  कविता प्रेमियों में अस्तित्व ‘अंकुर’ की एक अलग पहचान है ! देश के कई बड़े मंचों से इन्होंने कविताएं पढ़ी हैं, सोशल मीडिया पर इनकी दमदार मौजूदगी से अदब के चाहने वाले नावाक़िफ़ नहीं हैं ! इनकी कविताओं में समाज के हर समूह की तस्वीर नज़र आती है

अस्तित्व ‘अंकुर’ सुनते ही एक ऐसे व्यक्ति की छवि मन में आती है जो अक्खड़ है, अपनी धुन में रहता है, बेबाक है !
यह युवा कलमकार बिहार के सीवान से आते हैं । इनके पिताजी अधिवक्ता हैं और माँ संस्कृत महाविधालय में प्रोफ़ेसर | दो बहनों के बड़े भाई हैं | इनके नाना, माँ और मामा का शिक्षा और साहित्य से गहरा तअ’ल्लुक़ होने के बावजूद इनका मन कभी भी उपर्युक्त क्षेत्रों में न लग कर क्रिकेट में रहा । हालाँकि बाद में लंबी कॉर्पोरेट की नौकरी करने के बाद भी अंदर के कवि ने अपनी जगह बना ही ली और पिछले 5 वर्षों से अस्तित्व लगातार अपनी ग़ज़लों के जरिये उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं । मैं याद करूँ तो सोशल मीडिया के जरिये जिन कवियों ने अपनी पैठ मजबूत की उनमें अंकुर का नाम भी शुमार है ।

कविशाला कवियों और कविता के बीच में एक ऐसा माध्यम बनने के लिए प्रयासरत है जहाँ पर किसी भी कवि की रचना या कविता मृत न हो । हर कविता को उसका सम्मान मिलना चाहिए!
कविशाला में कवि अपनी कविताएँ ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों तरह से लोगों के साथ साझा कर सकते है | मई २०१६ में कविशाला की शुरुआत एक ऑनलाइन वेबसाइट www.kavishala.in से हुयी थी | पिछले डेढ़ वर्षों में कविशाला के साथ 6000 से ज्यादा कवि जुड़े और उनकी 35000 से ज़्यादा कविताएँ कविशाला द्वारा साझा की गयीं !
कविशाला देश के कई शहरों में हर महीने ‘मीट-अप’ करता है, जहाँ उस क्षेत्र के कवि और कविता प्रेमी इकट्ठे होकर अपनी कवितायेँ एक दूसरे को सुनाने के साथ-साथ उन पर विचार विमर्श भी करते हैं !

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