पुराने कवि और उनकी कवितायेँ उस वक्त की आवश्यकता थी – हमें आज की समस्याओ पर लिखना चाहिए :- Ankur Mishra

पिछले कुछ दिनों से मै यह सोचकर काफी परशान हूँ की कब तक हम और आप उन्ही पुराने मुद्दों पर लिखते रहेंगे !  माँ – पिता, लड़की – हमें जरूरत है देश और समाज के तात्कालिक मुद्दों पर लेखनी चलाने की ! कवि की कविता ऐसी होनी चाहिए जिससे लोगो को बस ‘मजा’ ही न आये, साथ साथ उस तक एक सन्देश भी पहुंचे! कवि की कविता समाज के किसी तबके तक सीमित नहीं होनी चाहिए उसे समाज का कोई भी तबका छोड़ना नहीं चाहिए ! कवि की कलम हर लड़की पर हो रहे जुल्म के उठने के साथ साथ उस वक्त भी उसी तरह उठनी चाहिए जब एक लड़के पर गलत आरोप मढ़े जाते है! समाज के पॉजिटिव साइड तो आज का कवि लिख रहा है मगर कहीं न कहीं वो दूसरा पहलू भूलता चला जा रहा है हमें उस पहलू पर लिखने की सबसे ज्यादा जरूरत है तभी हमारी कविता सार्थक होगी!

हम अपने पुराने और अच्छे कवियों को पढ़ते है, अच्छा है पढ़ना चाहिए मगर उनको कॉपी करना गलत बात है ! उन्होंने जो लिखा वो उस वक्त की आवश्यकता थी आज का माहौल दूसरा है हमें आज की परिस्थिति को देखते हुए कविता लिखनी चाहिए ! कविता समाज परिवर्तन का दर्पण होती है, अगर हमने और आपने अपनी कलम का उपयोग सही प्रकार से किया तो किसी भी हथियार की जरूरत नहीं होगी समाज परिवर्तन या सुधार के लिए ! हमारे पुराने कवियों ने खुलकर अपने समय की समस्यायों का विरोध किया और उनका समाधान निकालने वाली कविताओं का निर्माण किया !

अगर हमें उनका अनुसरण करना ही है तो हमें यह सोचना चाहिए की आज की समस्याओ के ऊपर हम कैसे लिख सकते है, जो समाज के हर तबके के लिए हो !

जो गरीब की गरीबी दूर में सहायक हो या उनका सन्देश सरकार तक पहुंचाने में सहायक हो ! रोजाना हो रहे हजारो मुद्दे ऐसे है जीने आवाज की जरूरत है उसके लिए हमें लिखना चाहिए !

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