Category: Yogesh Rathor

कोशिश 0

कोशिश

वो एक पेड़ सीधा लम्बा सा क़ई चींटो पक्षियों का घर था वो पर मेरे मन कि लालसा, उसी पेड़ पर जलेबीनूमा एक फल, हम उसे जंगलजलेबि कहते थे, जब वो पकजाती तो स्वाद...

भीड़ में..! 0

भीड़ में..!

​ये आँखों की शरारत है या नज़ाकत है कोई, ग़ज़ब ख़ूबसूरती उसकी मुझे सता रही है भीड़ में, उसकी हल्की सी मुस्कान की इबादत है कोई, वो मुझसे ही मेरा वजूद मिटा रही है...

शहर बाक़ी है.. 0

शहर बाक़ी है..

​ठहर के देख ज़रा तेरी बेवफ़ाई का कितना असर बाक़ी है, मेरी रगों में तेरे नामों निशाँ का और कितना क़हर बाक़ी है, छोड़कर तूने सोचा था मुझे बस अब ठहर जाएँगी मेरी साँसे,...

बचपन 0

बचपन

बचपन की उछल कूद ओर भोली नादानियाँ, याद है मुझे अभी चोरी छुपे की हुई शेतानियाँ, सुबह सुबह बेट बोल ले निकल जाते थे घर से, फिर दौड़ते आते करते स्कूल जाने की तैयारियाँ,...

गली तेरी आज फिर से सुनसान खड़ी है 0

गली तेरी आज फिर से सुनसान खड़ी है

गली तेरी आज फिर से सुनसान खड़ी है, झूटे वादों को समेटे आज वीरान खड़ी है, बेवफ़ाई नाम लूँ तो तौबा कर लेंगी साँसे, फिर उसके इश्क़ में हुई बदनाम खड़ी है, किस क़द्र...

मकान..! 0

मकान..!

उम्र बदलती रही पर वो एक ख़्वाब ना बदला, किराये की साँसे ओर किराये का मकान ना बदला, गुज़र गया बचपन ओर अब ये जवानी भी, कल जो था एक सवाल वो सवाल ना...

धुआँ..! 0

धुआँ..!

हर तरफ़ धुआँ है क्यूँ, आस्माँ झुक गया है क्या, ये कैसा शोर है बादलों में, क्यूँ ये दिन ढल गया, आँख है भरी भरी, हवा में रेत पिघल रही, रोड़ हैं जो रात...

भ्रम..! 0

भ्रम..!

​मैंने एक दशक उस खुदा की तालाश में गुज़ारा, कभी भटका मंदिर-मस्जिद तो कभी गिरजे गुरुद्वारा, रवायतों की सभी दीवारें बस ढोंग से रच रहे थे, धर्म की आड़ में सभी धर्म, इंसानियत के...

माँ..! 0

माँ..!

धुंधले से साये का साथ हो, बरगद की छाया का साथ हो, रहूं ज़मीं पर या आसमाँ में, मेरी माँ का वजूद मेरे साथ हो..!

कभी गोद में तो कभी कंधे पर 0

कभी गोद में तो कभी कंधे पर

कभी गोद में तो कभी कंधे पर, उस पिताह ने अपने बच्चे को घुमाया होगा, कभी डॉक्टर तो कभी वक़ील बनाने का, सपना सजाया होगा, उस मासूम की मासूमियत को, कई बार केमरे में...

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