Category: Yogesh Rathor

मकान..! 0

मकान..!

उम्र बदलती रही पर वो एक ख़्वाब ना बदला, किराये की साँसे ओर किराये का मकान ना बदला, गुज़र गया बचपन ओर अब ये जवानी भी, कल जो था एक सवाल वो सवाल ना...

धुआँ..! 0

धुआँ..!

हर तरफ़ धुआँ है क्यूँ, आस्माँ झुक गया है क्या, ये कैसा शोर है बादलों में, क्यूँ ये दिन ढल गया, आँख है भरी भरी, हवा में रेत पिघल रही, रोड़ हैं जो रात...

भ्रम..! 0

भ्रम..!

​मैंने एक दशक उस खुदा की तालाश में गुज़ारा, कभी भटका मंदिर-मस्जिद तो कभी गिरजे गुरुद्वारा, रवायतों की सभी दीवारें बस ढोंग से रच रहे थे, धर्म की आड़ में सभी धर्म, इंसानियत के...

माँ..! 0

माँ..!

धुंधले से साये का साथ हो, बरगद की छाया का साथ हो, रहूं ज़मीं पर या आसमाँ में, मेरी माँ का वजूद मेरे साथ हो..!

कभी गोद में तो कभी कंधे पर 0

कभी गोद में तो कभी कंधे पर

कभी गोद में तो कभी कंधे पर, उस पिताह ने अपने बच्चे को घुमाया होगा, कभी डॉक्टर तो कभी वक़ील बनाने का, सपना सजाया होगा, उस मासूम की मासूमियत को, कई बार केमरे में...

ढोंग का अंत..! 0

ढोंग का अंत..!

कहते हैं, जाती धर्म पर देश टुकड़ों में बँटा हुआ है, मगर आज मैं सोचने पर मजबूर हूँ, कोन है जो आज देश जला रहें हैं, किस जाती के हैं ये लोग, इन्हें हिन्दू...

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कोई बलात्कारियों को सज़ा दिलाने के लिए केंडल मार्च निकालता है, कोई बलात्कारियों को बचाने के लिए सारा देश जलाता है, शायद सही है ये देश बहरा है धमाके की आवाज़ ही सुनता है,...

दूर निकल आया हूँ..! 0

दूर निकल आया हूँ..!

दूर निकल आया हूँ… कुछ पन्ने जो निकल गये हैं किताब से, उनकी जगह ख़ाली छोड़ आया हूँ, ज़िंदगी की भरी किताब के कुछ हसीन पन्ने छोड़, में दूर निकल आया हूँ जिस घर...

आँखे बोलती है 0

आँखे बोलती है

बरसात आज फिर अपना रंग फ़िज़ाओं में बिखेर गई… मंद-मंद सी खुसबू वो हवाओं में उड़ा गई. पेड़ पर लगे पत्तों को नए कपड़े पहना गई. मिट्टी में छुपे मेंढकों की धुन फिर सुना...

आँखे बोलती है..! 0

आँखे बोलती है..!

आँखे बोलती है…! लोग कहते है आँखे बोलती है, दिलों के राज खोलती है, ज़ुबाँ से पहले वो मॅन को टटोलती हैं, जता देती हैं वो दूसरो को क्यूँ इस कदर, क्यूँ मन की बात...