Category: Vivek Bijnori

कूड़े के ढ़ेर में.. 0

कूड़े के ढ़ेर में..

मुझको हँसी पड़ी मिली कूड़े के ढ़ेर में, इक जिंदगी पड़ी मिली कूड़े के ढ़ेर में। वो ढूंढता था क्या भला था उसको क्या मिला, शायद ख़ुशी पड़ी मिली कूड़े के ढ़ेर में। वो...

सुकूँ की नींद को तरसा हुआ है 0

सुकूँ की नींद को तरसा हुआ है

सुकूँ की नींद को तरसा हुआ है, ये जुगनू रास्ता भटका हुआ है। लगा यूँ तीरगी तो मिट गयी पर, अँधेरा जह् न में अटका हुआ है। मुसीबत की घड़ी में साथ देगा, जमाना...

धनाक्षरी 0

धनाक्षरी

“अंधविश्वास कैसा आस्था के नाम लोग, हिंसा का तांडव सरे आम किये जाते हैं। भक्त ये हैं बन बैठे ऐसे बाबाओं के सुनो, गुरु शब्द को जो बदनाम किये जाते हैं। खोलो अपनी आंखें...

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे 1

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे वो क्या,कैसे ओर कब पूछेंगे।। मेरी गजलों को पढ़कर लोग सभी। मेेरे शेरोंं का मतलब पूछेंगे। मैं ख़ामोश हूँगा तू फ़िक्र ना कर। वो ऐसे सवाल कभी जब पूछेंगे।...

Please wait...

Never Miss Any Poetry, Join Our Family

Want to be notified when any New Poetry Published? Enter your email address and name below to be the first to know.