Category: Vikram Srivastava

ऐ दिल के मेहमान 0

ऐ दिल के मेहमान

तुझको अपनी ग़ज़लों का उन्वान बना लूंगा ऐ दिल के मेहमान तुझे मैं जान बना लूंगा ऐ दिल के मेहमान.. मेरे ख़्वाबों पे रहता है अब तेरा पहरा मुझे आईने में दिखता बस तेरा...

ग़ज़ल: तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है 1

ग़ज़ल: तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है

तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है तेरे कंगन से मैने चाँद की गोलाई नापी है ख़ुदा ने एक बस तुझको बनाया है बिना ख़ामी सो तेरे हुस्न से दुनिया की हर अच्छाई नापी...

आपके शहर में 0

आपके शहर में

बड़ी खामोश है हर शाम आपके शहर में मुझे मिलता नहीं आराम आपके शहर में अमीरों का शहर है ये यहाँ हैं सब शहंशाह अजी है ख़ास सारे आम आपके शहर में चले आये...