Category: Vikram Srivastava

ग़ज़ल: तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है 1

ग़ज़ल: तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है

तेरी साँसों से मैने खुशबू-ए-पुरवाई नापी है तेरे कंगन से मैने चाँद की गोलाई नापी है ख़ुदा ने एक बस तुझको बनाया है बिना ख़ामी सो तेरे हुस्न से दुनिया की हर अच्छाई नापी...

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आपके शहर में

बड़ी खामोश है हर शाम आपके शहर में मुझे मिलता नहीं आराम आपके शहर में अमीरों का शहर है ये यहाँ हैं सब शहंशाह अजी है ख़ास सारे आम आपके शहर में चले आये...