Category: Vikas Bansal

खाता क़सम वो देश पर मर मिटने की 0

खाता क़सम वो देश पर मर मिटने की

खाता क़सम वो देश पर मर मिटने की दिल में उसके देशभक्ति का तूफ़ान रहता है वो मरता नहीं अमर हो जाता है शहीद हो कर जवान होता है वो उम्र भर जवान रहता...

कभी नज़र आना, कभी छुप जाना 0

कभी नज़र आना, कभी छुप जाना

कभी नज़र आना, कभी छुप जाना आदत ये चाँद की बहुत पुरानी है इतराता है वो अपने हुस्न पे न पुछ दुनियाँ उसकी चाँदनी की दिवानी है मोहब्बत में बहुत काम आता है वो...

किसी की इज़्ज़त तार तार करना चाहता हूँ 0

किसी की इज़्ज़त तार तार करना चाहता हूँ

किसी की इज़्ज़त तार तार करना चाहता हूँ मैं आज चापलूसी से इंकार करना चाहता हूँ सूरज को दिखाना चाहता हूँ आईना मैं आज जुगनुओं से रौशनी मैं गुलज़ार करना चाहता हूँ नफरतों से...

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी 0

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी

कोई बताये कि कैसे बितायें रातें हम अपनी घूमने गया है कहीं चाँद मेरे शहर का उफ़ान पर है संमदर देख स्याहा काली रात घुसने को है पानी घर में उँची उँची लहर का...

मुश्किलों से अपनी दो चार हाथ करते हैं 0

मुश्किलों से अपनी दो चार हाथ करते हैं

मुश्किलों से अपनी दो चार हाथ करते हैं चलो आज आमने सामने बात करते हैं क्यों खेले खेल हम आँख मिचौली का बुलाओ सबको आज मुलाक़ात करते हैं लोग तो सोचते रहे और वो...

मैंने तो बहुत छुपा के रखा दुख 0

मैंने तो बहुत छुपा के रखा दुख

मैंने तो बहुत छुपा के रखा दुख पर आँखों ने बता ही दिया छलक छलक के बाते चाँद तारों की करते रहे हम आईना जुगनुओं ने दिखा दिया चमक चमक के बड़ी गहरी नींद...

बीते बचपन को बुलाते हैं 0

बीते बचपन को बुलाते हैं

है बच्चों का दिन चलो पुराना इतवार मनाते हैं भूल चुके जिसे सब गुजरे बचपन को बुलाते हैं घुमते हैं मोगली के साथ जंगल और जाके महाभारत काल में समय का पहिया घूमाते हैं...

आज कोई मेरे नखरे नहीं उठाता 0

आज कोई मेरे नखरे नहीं उठाता

आज कोई मेरे नखरे नहीं उठाता रूठ जाऊँ तो मुझे कोई नहीं मनाता छोड़ दूँ घर जो तो कोई नहीं ढूंढने आता गलतीयों पर मेरी कोई मुझे नहीं सुनाता वो छड़ी की मार डंडे...

बच्चों का आप बस बच्चा रहने दो 0

बच्चों का आप बस बच्चा रहने दो

बच्चों का आप बस बच्चा रहने दो न खेलो उनके बचपन से हर बार तुम न पकड़ाओ उनके हाथों में औज़ार तुम न उन्हें बेचने को कुछ बनाओ बाज़ार तुम न करो यौन शोषण...

हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते है 0

हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते है

हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते है हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते है मिलना मिलाना चलता रहता है सियासत में सुना है दुश्मनों से आजकल हमारे सनम मिलते...

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