Category: Vikas Bansal

आजादी की लौ को जला के रखा है 0

आजादी की लौ को जला के रखा है

आजादी की लौ को जला के रखा है हमने तिरंगा दिलों में बसा के रखा है करते आभार सरहद पर खड़े जवान का दुश्मनों की नज़र से हमें बचा के रखा है हो गये...

मर गये वो सब बस कुछ अफ़वाहों से 0

मर गये वो सब बस कुछ अफ़वाहों से

मर गये वो सब बस कुछ अफ़वाहों से तुम क्या पूछोगे अब सवाल गवाहों से गिर चुके है तुम बहुत उठना है मुश्किल सँभलों नहीं तो गिर जाओगे निगाहों से सवाल, सवाल तो बहुत...

वो सुनाते रोज ग़ज़ल पुरानी 0

वो सुनाते रोज ग़ज़ल पुरानी

वो सुनाते रोज ग़ज़ल पुरानी रोज नयी सुना रहा हूँ मैं फक्कड़ हो गया तेरे प्यार में बस ग़म खा रहा हूँ मैं मर्ज़ मेरा कोई समझ नहीं पाता हकीमों के चक्कर लगा रहा...

सोचता हूँ तो मजबूर हो जाता हूँ 0

सोचता हूँ तो मजबूर हो जाता हूँ

सोचता हूँ तो मजबूर हो जाता हूँ मैं सच से, सच्चाई से दूर हो जाता हूँ जादू तो अकसर चलता है शब्दों का मैं तो बस यूँ ही मशहूर हो जाता हूँ देते हैं...

ये जश्न है पूरी ज़िंदगी मनाने का 0

ये जश्न है पूरी ज़िंदगी मनाने का

सुख-दुख के अफ़साने का, ये राज़ है सदा मुस्कुराने का, ये पल दो पल की रिश्तेदारी नहीं, ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का, जिन्दगी में आकर कभी ना वापस जाने का, ना...

वो दोस्त याद आता है 0

वो दोस्त याद आता है

था वो एक सपना जो टूट गया पता नहीं चला और दोस्तों का साथ छूट गया वो पतंग के मांझे से हाथ का कटना वो आउट होने पे बल्ले का झटकना वो होना लड़ाई...

दोस्त बनाते हैं हम 0

दोस्त बनाते हैं हम

जो रिश्ता भगवान बनाना भूल गए वो रिश्ता ख़ुद बनाते हैं हम और सब पल दो पल का साथ इसे ज़िंदगी भर निभाते हैं हम और शर्त ना कोई माने जो उससे सारी शर्त...

है बार्बी डॉल गुड़िया रानी मेरी बहना है 0

है बार्बी डॉल गुड़िया रानी मेरी बहना है

है बार्बी डॉल गुड़िया रानी मेरी बहना है करती खटपट है नटखट सबका कहना है है बिल्लो रानी सुनती है रात दिन वो कहानी खाती लड्डू पेड़े दूध बताशा और पीती पानी करती खूब...

नकाब (NAKAB) 0

नकाब (NAKAB)

इन  अश्को   को  बहने  दूँ   या  फिर   छुपा  लूँ   कहीं कुछ  परदे  खोल  दूँ  या  फिर  ओढ़  लूँ  नकाब  नया  कोई मैं  बगुला  सा  अडिग  निज  ध्येय  पर विश्वासघाती  प्रपंच   को  सह  नहीं  सकता ...

सासें हैं फिर भी ज़िंदा होने को जी चाहता है 0

सासें हैं फिर भी ज़िंदा होने को जी चाहता है

सासें हैं फिर भी ज़िंदा होने को जी चाहता है, उड़ जाऊँ ज़िन्दगी के साथ परिंदा होने को जी चाहता है कर दे शायद आज फिर पूरी मेरी हर फरमाईश, आज फिर फरमाईशों का...