Category: Sheetal Goel

ग़ज़ल… आतंकवाद 0

ग़ज़ल… आतंकवाद

क्यों यहाँ ये आदमी बीमार है जुल्म करना समझता अधिकार है! नफरतों की आंधियां जब भी चलीं इंसां ही इंसां पे करता वार है! सूरतें हर हाल में बिगड़ी वहाँ नौनिहालों पे जहाँ हथियार...

ज़िन्दगी भी एक तमाशा है लेकिन 0

ज़िन्दगी भी एक तमाशा है लेकिन

ज़िन्दगी भी एक तमाशा है लेकिन ये पर्दा धीरे से उठाया करो पता है कि महफ़िल की शान हो तुम पर यूँ न बिजलियाँ गिराया करो!   इम्तहान कब तक लोगे इस दिल का...

वो प्यार करते हैं 0

वो प्यार करते हैं

वो प्यार करते हैं तो उजाला फैलाते हैं गर हमने कह दिया तो बुरा मान जाते हैं! माना कि उनकी मुस्कुराहट पर निसार है ज़माना गर हम हँस दिए तो आवारा कहलाते हैं!!

सियासत 0

सियासत

सियासत में जो रहने के ग़लत अंदाज़ अपनाये समझ लेना कि जनता से कभी वो छुप नहीं पाये नहीं समझे अग़र अब भी सियासतदार ये बातें तो रखना याद तुम इक दिन कि जनता...

किसको न ज़िन्दगी में किरदार चाहिए 0

किसको न ज़िन्दगी में किरदार चाहिए

किसको न ज़िन्दगी में किरदार चाहिए नफ़रत के इस जहान में बस प्यार चाहिए हर पल बहे नदी जब पत्थर के रास्ते क्यों फिर उसे चहुँ तरफ दीवार चाहिए लहरों छुपाये दर्द को बहती...

क्यों नहीं सुनाई पड़ती इनको किसी की आह! 0

क्यों नहीं सुनाई पड़ती इनको किसी की आह!

क्यों नहीं सुनाई पड़ती इनको किसी की आह! क्यों कर देते हैं इतना बड़ा गुनाह! क्यों कुछ मिनटों में बरबाद कर देते हैं ज़िन्दगी क्यों है इतनी दरिंदगी! क्यों नहीं सोंचते एक पल क्या...

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