Category: Sachin Om Gupta

गरीबी 0

गरीबी

जीवन की इस तपन को मैं रोज महसूस करता हूं, आओ आज मेरे साथ मैं तुम्हें गरीबी से मिलाकर लाता हूं| कैसा भी हो संघर्ष हम कभी पीछे हटेंगे नहीं, जैसा भी हो समय...

“कविशाला” के साथ 0

“कविशाला” के साथ

उर की हो पीड़ा या हो तुम उदास, लिख डालो बस “कविशाला” के साथ |   जीवन की हो उलझन या हो किसी की बात, लिख डालो बस “कविशाला” के साथ |   हो...

मेरे एहसासों के अल्फाज 0

मेरे एहसासों के अल्फाज

जीवन की कहानी को नए पन्नों में लिखेंगे आज, बीते हुए कल को भूलकर कुछ नया एहसास करेंगे आज करेंगे वादा कुछ कर गुजरने का खुद से आज, इस नव वर्ष को बना लेंगे...

मैं चित्रकूट का घाट तेरा 0

मैं चित्रकूट का घाट तेरा

  तुमसे ही सम्मान मिला है, तुमसे ही पहचान मेरी तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा |   तुम बन जाओ मेरी प्रेयषी गंगा, मैं बन जाऊँ अनुरागीं तेरा तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा |   कंदमूल, वानर है सब मेरे साथी, तुम बन जाओ गंगा सखी मेरी तुम गंगा का बहता पानी, मैं चित्रकूट का घाट तेरा |   मैं अधूरी मेरे राम के बिना तुम बन जाओ सीता मेरी, मैं बन जाऊँ राम तेरा...

कुछ यादें – कुछ सपने 0

कुछ यादें – कुछ सपने

 ” बस वही यादें “ यादें एक सरल शब्द है, केवल जहन की बातें या तकलीफें हैं यादें, कुछ बातें, कुछ मुलाकातें और फिर यादें | मिलना और मिल के बिछड़ना , तस्वीरें देख...

हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें 0

हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें

हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो पहली नजर में आँखों में बसी न हो.. हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो देखकर इश्क़ को शरमायी न हो… हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो ख़्वाबों में आई न हो… हम उस इश्क़ को इश्क़ क्या कहें, जो इश्क़ की...

बस शर्त इतनी है 0

बस शर्त इतनी है

 जिन्दा रिश्तों को जब भी संभाला जाए, बस शर्त इतनी है की गड़े मुर्दों को उखाड़ा न जाए |   मेरी बदनामी का किस्सा बेशक उछाला जाए , बस शर्त इतनी है की मेरी नेकचलनी को भी सामने लाया जाए |   पत्थर के देवता का भोग बेशक निकाला जाए, बस शर्त इतनी है की गरीब के मुँह में भी निवाला जाए |   साल की हर अमावस को दीवाली का त्योहार बना डाला जाए, बस शर्त इतनी है की अँधेरे झोपड़ो में भी उजाला लाया जाए |   घर में कुत्तों को बेशक बच्चों की तरह पाला जाए , बस शर्त इतनी है की बूढ़े माँ–बाप को घर से निकाला न जाए |   मैं कहता हूँ ये मुर्दा जिस्म बेशक मेरा फूँक डाला जाए, बस शर्त इतनी है की इसमें से मेरा जिन्दा दिल निकाला जाए |

“चाय” का एक प्याला 0

“चाय” का एक प्याला

“चाय” का एक प्याला दिन भर की सुस्ती छू हो जाए, और दिन बन जाए निराला  जब मिल जाए, “चाय” का एक प्याला….. बारिश का हो मौसम या पड़ रहा हो पाला, बेसन प्याज...

“प्रेम” की कविता 0

“प्रेम” की कविता

“प्रेम” की कविता तुम्हे तुमसे भी ज्यादा चाहने लगा हूँ, तुम्हे तुमसे भी ज्यादा जानने लगा हूँ | जब से तुमको देखा है मेरी दुनिया ही बदल गई, ख्वाबों ने लिया ऐसा रूप और...

काश ! से घिरी जीवन की अपेक्षाएँ 0

काश ! से घिरी जीवन की अपेक्षाएँ

काश की जिंदगी में कोई काश न आए, काश हम अपने हर सपने को हकीकत में जी पाएं।। काश इस काश को हम जिंदगी से मिटा पाएं।। काश हम सपनों को जिंदगी से रूबरू...

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