हम जब बच्चे थे और बरसात होती थी

हम जब बच्चे थे और बरसात होती थी उस दिन मानो जैसे खुशियों की सौगात होती थी हम अपनी अपनी कागज़ की कश्तियाँ तैराते थे और मस्ती से छप-छप करते भीगते- भिगाते थे बारिश...