Category: nilabh Singh

कोई  कभी  भी  खराब हो सकता है 0

कोई कभी भी खराब हो सकता है

कोई कभी भी खराब हो सकता है पानी भी तो शराब हो सकता है। हर वक्त वो इतना खुश दिखता है वो हँसना भी नकाब हो सकता है। सही तालीम औ परवरिश जुरुरी हैं...

आईना मेरा मुझसे हर वक्त कहता है 0

आईना मेरा मुझसे हर वक्त कहता है

आईना मेरा मुझसे हर वक्त कहता है मेरे घर में अब कोई और रहता है। कब्र पे चढ़े गुलाबों की क्या खता किसी और का दर्द कोई और सहता है। ये ऊँची इमारतें बनीं...

लकीरों  को  पढ़ना  नहीं आता, फकीरों  से  लड़ना  नहीं  आता 0

लकीरों को पढ़ना नहीं आता, फकीरों से लड़ना नहीं आता

लकीरों को पढ़ना नहीं आता फकीरों से लड़ना नहीं आता। अपने आप में खुश रहता हूँ मैं मुस्कुराहट खरीदना नहीं आता। क्या सही क्या गलत छोड़ो भी बातों को पकड़ना नहीं आता। अश्कों को...

चंद  दीवारों , इक  छत  को  मैं  घर  नहीं कहता 0

चंद दीवारों , इक छत को मैं घर नहीं कहता

चंद दीवारों , इक छत को मैं घर नहीं कहता जहाँ परिंदों का वास नहीं मैं शज़र नहीं कहता। जिनका कोई भी ताल्लुक ना हो जिंदगी से मेरी अखबार में छप जायें , मैं...

मुहब्बत को  खुदा  का  इक असर कहता हूँ 0

मुहब्बत को खुदा का इक असर कहता हूँ

मुहब्बत को खुदा का इक असर कहता हूँ दिमाग से दिलों का आसां सफर कहता हूँ। झुग्गियों तक पहुँचे जहाँ महलों की रोशनी उस पाक नगर को ही मैं शहर कहता हूँ। क्या शाखें...