Category: nilabh Singh

जिसमें  कोई  भी डर नहीं है 0

जिसमें कोई भी डर नहीं है

जिसमें कोई भी डर नहीं है अब ऐसी कोई नज़र नहीं है। मुंतजिर बना दे खबरों का इक ऐसी कोई खबर नहीं है। मेरे हिस्से का भी तुम ले लो जो टुकड़ा हो वो...

मैं  जुड़  रहा  हूँ  रफ़्ता रफ़्ता 0

मैं जुड़ रहा हूँ रफ़्ता रफ़्ता

मैं जुड़ रहा हूँ रफ़्ता रफ़्ता मैं खुल रहा हूँ रफ़्ता रफ़्ता। पलकें बन गयीं जटा शिव की मैं धुल रहा हूँ रफ़्ता रफ़्ता। समंदर गहरा उन आँखों में मैं घुल रहा हूँ रफ़्ता...

मेरी  गज़ल  का  कोई दाम नहीं है 0

मेरी गज़ल का कोई दाम नहीं है

मेरी गज़ल का कोई दाम नहीं है लिखना इश्क है,इश्क काम नहीं है। दिमाग के रंग में ये रंगने लगा है बेवजह ही दिल परेशान नहीं है। हँसी खरीदते हैं , बेचते हैं आँसू...

खौफ  के  अँधेरे  में  पल रहा आदमी 0

खौफ के अँधेरे में पल रहा आदमी

खौफ के अँधेरे में पल रहा आदमी उगते सूरज के संग ढल रहा आदमी। “मैं” के बोलबाले में “हम” गुम हुआ आदमी को ही अब खल रहा आदमी। गम यही कि मेरा उससे क्यूँ...

तुझ सा नज़र मैं आऊँ कैसे 0

तुझ सा नज़र मैं आऊँ कैसे

तुझ सा नज़र मैं आऊँ कैसे रोशनी से दौड़ लगाऊँ कैसे। बुला रहा है दिल जमीर को सोते हुए को मैं जगाऊँ कैसे। मेरे बहाने भी सरकारी हुए रूठे हो तुम मनाऊँ कैसे। जाग...

मुझे  तवज्जो  मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो 1

मुझे तवज्जो मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो

मुझे तवज्जो मत दो,न ही मुझे तुम दाद दो इस रिश्ते को लेकिन न नफरत की खाद दो। ब्लैक होल है ये दिल,कुछ वापिस जाता नहीं घुट घुट के मर जाऊँगा,मुझे न कोई याद...

थोड़ी  अना  तो  हम  जुरुर  रखते  हैं 0

थोड़ी अना तो हम जुरुर रखते हैं

थोड़ी अना तो हम जुरुर रखते हैं दिल को दिमाग से ज़रा दूर रखते हैं। पिलाती हैं हँसती तो कभी रोती आँखें कुछ यूँ मुसलसल हम सुरूर रखते हैं। तलब है नवाबी की अब...

सुबह  आयी  है तो शाम आयेगी 0

सुबह आयी है तो शाम आयेगी

सुबह आयी है तो शाम आयेगी फिर तन्हाई ही तो काम आयेगी। हुक्मरां कर रहें हैं बातें मीठी बहुत जल्द ही लगाम आयेगी। चीज़ अच्छी ऐसे ही नहीं कहता पता है वो बन के...

हमें जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है 0

हमें जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है

हमें जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है जो जिन्दा हैं क्या ये इनायत नहीं है। लहू के धब्बों को तेरा बोसा बताया क्या काफी ये तेरी हिमायत नहीं है। राम ,रावण,कंस,कृष्ण एक शख्स में...

इश्क हो नहीं रहा, किया जाए क्या 0

इश्क हो नहीं रहा, किया जाए क्या

इश्क हो नहीं रहा,किया जाए क्या जिंदगी को मौका ,दिया जाए क्या। बहुत कुछ खरीदा बाजार से हमने सुकून भी थोड़ा, लिया जाए क्या। पी लिया सब कुछ,बेखुदी न मिली दो घूंट जहर ही...